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एनडीए बनाम इंडिया:अब विधानसभा उपचुनाव में होगी परीक्षा, अखिलेश, राहुल, योगी और मोदी की प्रतिष्ठा होगी दांव पर

Fri, 07 Jun 2024 10:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, लखनऊ

सार

घमासान की उम्मीद है। लोकसभा चुनाव परिणाम जारी होने के बाद दोनों गठबंधनों ने उपचुनाव पर मंथन शुरू कर दिया है।
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उपचुनावों में होगी दोनों दलों की परीक्षा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा उपचुनाव में एनडीए और इंडिया को परीक्षा देनी होगी। जबर्दस्त घमासान होने की उम्मीद है। लोकसभा चुनाव परिणाम जारी होने के बाद दोनों गठबंधनों ने उपचुनाव पर मंथन शुरू कर दिया है। सपा के चार, भाजपा के तीन, निषाद पार्टी और रालोद के एक-एक विधायक सांसद बन गए हैं। ऐसे में इंडिया को चार और एनडीए को पांच विधानसभा सीटों के लिए ताकत लगानी होगी। इन सीटों पर छह माह के अंदर उपचुनाव होना है। वहीं, भाजपा के एक एमएलसी भी सांसद बने हैं।

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भाजपा के गाजियाबाद विधायक डॉ. अतुल गर्ग वहीं से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में पार्टी वहां से वैश्य उम्मीदवार उतारती है अथवा किसी अन्य पर दांव लगाती है, इसे लेकर चर्चा शुरू चुकी है। इसी तरह अलीगढ़ जिले के खैर से विधायक अनूप बाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए हैं। इस सीट पर भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। फूलपुर विधायक प्रवीण पटेल फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से ही सांसद चुने गए हैं। मिर्जापुर जिले के मझवां से निषाद पार्टी के विधायक डॉ. विनोद बिंद अब भदोही से सांसद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में मझवां सीट निषाद पार्टी के खाते में रहेगी अथवा नहीं, इस पर चर्चा तेज हो गई है।

सपा के साथ गठबंधन में मीरापुर विधानसभा सीट जीतने वाले रालोद अब भाजपा के साथ है। मीरापुर के विधायक चंदन चौहान बिजनौर से सांसद चुने गए गए हैं। ऐसे में इस सीट पर भी निगाहें लगी हैं। यह सीट उपचुनाव में रालोद के खाते में रहेगी अथवा नई रणनीति अपनाई जाएगी, इस पर भी चर्चा चल रही है।
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अयोध्या में फिर होगा प्रयोग या लड़ेगा परिवार

  • सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद चुने गए हैं। वह मैनपुरी के करहल से विधायक हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि वह केंद्र की राजनीति करेंगे। ऐसे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर भी निगाहें लगी हैं। हालांकि करहल से उनके भतीजे तेज प्रताप यादव को उम्मीदवार बनाने की संभावना है। क्योंकि वह मैनपुरी से पूर्व सांसद हैं। डिंपल यादव के सांसद चुने जाने के बाद भी वह निरंतर सक्रिय भूमिका में रहते हैं। इसी तरह मिल्कीपुर से विधायक अवधेश प्रसाद फैजाबाद से सांसद बने हैं।
  • सपा ने सामान्य सीट पर दलित उम्मीदवार उतारकर नया प्रयोग किया, जो सफल रहा। ऐसे में अब मिल्कीपुर से संभावित उम्मीदवार के तौर पर अवधेश प्रसाद के बेटे अमित प्रसाद को मौका मिलेगा अथवा नई रणनीति अपनाई जाएगी। अमित पहले भी दावेदारी कर चुके हैं। इसी तरह कटेहरी से विधायक लालजी वर्मा अब अंबेडकरनगर से सांसद बन गए हैं। यहां से उनकी बेटी आंचल भी दावेदार है। कुर्मी बिरादरी के अन्य कई नेता भी जोर आजमाइश में लगे हैं। 
  • मुरादाबाद जिले के कुंदरकी से विधायक जियाउर रहमान बर्क संभल से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में कुंदरकी सीट पर जियाउर रहमान के पिता मामलुक उर रहमान और यहां के पूर्व विधायक मोहम्मद रिजवान प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में पार्टी के सामने इन सीटों पर समन्वय स्थापित करते हुए इन्हें जीतने की चुनौती है। दूसरी चुनौती यह भी है कि उपचुनाव में कांग्रेस की भूमिका क्या होगी?

एमएलसी में किसे मिलेगा मौका
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद विधान   परिषद सदस्य हैं। वह पीलीभीत से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में खाली होने वाली इस सीट पर भाजपा किसे मौका देगी, इस पर निगाहें लगी हैं। अभी विधान परिषद में भाजपा के 72 और सपा के सात एमएलसी हैं।

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