घूसखोरी में पकड़े गए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के सुपरिंटेंडेंट कालिका प्रसाद ने कुछ और अधिकारियों की इस रैकेट में संलिप्तता की बात कुबूली है।
सीबीआई इन बयानों के तथ्यों की तस्दीक कर रही है। साथ ही सीबीआई ने मंगलवार को व्यापारी अंकित शुक्ला व वकील संत सरन से घूस देने के लिए जुटाई गई रकम के बारे में पड़ताल की।
नशीली व प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के आरोप में गिरफ्तार कारोबारियों को छोड़ने के लिए डील करते पकड़े गए एनसीबी के सुपरिंटेंडेंट कालिका प्रसाद व दो अन्य को सीबीआई ने मंगलवार सुबह रिमांड अवधि शुरू होते ही अपनी कस्टडी में ले लिया।
इनसे दिन भर पूछताछ की गई। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कालिका प्रसाद ने कहा कि वह अधीक्षक के पद पर तैनात है और उसके अकेले के दम पर विवेचना को कमजोर कर आरोपियों को लाभ नहीं पहुंचाया जा सकता था।
उसने सीबीआई को ब्यूरो के कुछ अधिकारियों के नाम बताए हैं और कहा है कि उनका संकेत मिलने के बाद ही उसने यह डील की। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कालिका प्रसाद के बयान की सच्चाई की तस्दीक की जा रही है।
सीबीआई ने पकड़े गए व्यापारी अंकित शुक्ला से भी गहन पूछताछ की। अंकित ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार हुए तीनों दवा कारोबारियों दलजीत सिंह, अनिल जयसिंह और विक्की से डील के लिए 50 लाख रुपये मिले थे।
इसमें से 20 लाख से अधिक उसने प्रॉपर्टी की एक डील में लगा दिए जबकि 21 लाख रुपये घूस के लिए दे दिए थे।
वकील संत सरन के घर से सीबीआई ने 16 लाख रुपये बरामद किए थे जबकि अनित शुक्ला से साढ़े छह लाख रुपये बरामद हुए थे।
पूछताछ में सामने आया कि संत सरन को अनित ने 21 लाख दिए थे, जिसमें से तीन लाख तो मौके से बरामद हुए थे और 16 लाख उसके घर से।
दो लाख रुपये संत सरन ने इस्तेमाल कर लिए। हालांकि संत सरन ने सीबीआई के सामने दो लाख का इस्तेमाल किए जाने की बात अभी तक नहीं कुबूली है।
संत सरन ने सीबीआई से कहा है कि वह अधिवक्ता है और एनसीबी के मामले देखता है। जब एनसीबी ने धरपकड़ की तो अनित शुक्ला ने उससे संपर्क कर डील कराने को कहा था।
उसने अधीक्षक से बात की तो वह तैयार हो गए। उसकी भूमिका दोनों पार्टियों को आपस में मिलाने की थी और अभी उसे इसके लिए कोई रकम नहीं मिली है।
सीबीआई के सूत्र बताते हैं कि अनित शुक्ला ने यह भी स्वीकार किया है कि वह पूर्व में भी दो मामलों में एनसीबी के अधिकारियों के साथ डील करा चुका है।
इस मामले की पड़ताल के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि नशीली व प्रतिबंधित दवाओं के इस मामले की विवेचना कर रहे अधिकारी को हटाकर दूसरे अधिकारी को विवेचना सौंप दी गई थी।
वहीं, एनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक प्रवीण सिंह ने कहा कि विवेचक के अवकाश पर जाने के कारण दूसरे विवेचक को विवेचना सौंप दी गई थी।