उर्दू नाटक ‘आखरी ताजदार’ का मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। भारतीय नारी सम्मान एवं बाल विकास संस्थान की ओर से उर्दू नाटक ‘आखरी ताजदार’ के मंचन में लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह का किरदार निखरकर सामने आया। नाटक से यह दिखाने की कोशिश की गई कि किस तरह अंग्रेजों ने नवाब वाजिद अली शाह और अवध को धोखा दिया। नवाब ने अंग्रेजों के उस मुहायदे पर दस्तखत करने से इन्कार कर दिया, जिसमें वह चाहते थे कि नवाब वाजिद अली शाह बादशाह बने रहें, लेकिन जनता पर हुक्म अंग्रेजों का चले।
नवाब मसूद अब्दुल्लाह के लेखन और निर्देशन से सजे नाटक में दिखाया गया कि नवाब वाजिद अली शाह के कोलकाता चले जाने के बाद बेगम बेगम हजरत महल ने वतन के लिए फर्ज निभाते हुए बेटे शहजादा बिरजीस कद्र को बहादुर सिपहसालारों के साथ मिलकर अवध का ताजदार मुकर्रर कर दिया। सह निर्देशन संजय त्रिपाठी ने किया। नवाब वाजिद अली शाह की भूमिका निभाई नवाब मसूद अब्दुल्लाह ने। नाटक रंगकर्मी स्व. विनय श्रीवास्तव को समर्पित किया गया। अवसर पर लखनऊ की विरासत, संस्कृति और रंगमंच को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान के लिए नवाब मसूद अब्दुल्लाह को अवध सम्मान से नवाजा गया।