लखनऊ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के स्थापना दिवस पर मंगलवार को विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में कार्यक्रम हुए। विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने कहा कि मानव विकास के जितने भी रूप देख रहे हैं, वे प्राकृतिक खनिज की ही देन है और इसकी खोज में जीएसआई ने अहम योगदान दिया है। मौजूदा समय में भी प्राकृतिक खनिज के बिना विकास संभव नहीं।
कार्यक्रम में जीएसआई की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश के लौह अयस्क, जम्मू के लीथियम, हिमाचल प्रदेश के वैनेडियम की उपलब्धता व अन्य खनिज पदार्थों के बारे में जानकारी दी गई। नवीनतम विधाओं के प्रयोग से भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में अन्वेषण कार्य के बारे में भी बताया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. अशोक साहनी ने बताया कि आजादी से पहले और बाद की परिस्थितियों के आधार पर जीएसआई के कार्य क्षेत्रों में बदलाव हुए। डिजिटल तकनीक का उपयोग, ड्रोन विधि और हाइपर स्पेक्ट्रल तकनीक के आधार पर प्राकृतिक खनिज की खोज जारी है।
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग धातु, खनिज पदार्थों व बेशकीमती पत्थरों से बनी मूर्तियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में उपयोग में लाई गई तमिलनाडु की ग्रेनाइट और राजस्थान की सैंडस्टोन पत्थर के अलावा रामलला का विग्रह बनाने में इस्तेमाल किया गया स्टेटाइड पत्थर भी शामिल था।
वरिष्ठ भूवैज्ञानिक अभिषेक कुमार ने बताया कि देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रों में प्राकृतिक खनिज की खोज के लिए प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश के ललितपुर, झांसी, बुंदेलखंड व नदी के तटीय क्षेत्रों में भी सर्वेक्षण हो रहा है। कार्यक्रम में उपमहानिदेशक सुप्रिया साहा, संजीव कुमार, अजय कुमार तलवार, शंभूनाथ व अन्य अधिकारी शामिल हुए। भूवैज्ञानिक क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।