उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती और खेत तालाब योजना सरकार की प्राथमिकता में हैं। इसे दार देने के लिए कैबिनेट से 1191 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। इसके लिए बीज से लेकर बाजार तक प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सरकार से बढ़ावा मिल रहा है। रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती जन, जमीन और जल के लिए संजीवनी है। इसको ध्यान में रखकर इसे बढ़ाया जा रहा है।
नदियों के दोनों किनारों पर निश्चित दायरे में प्राकृतिक खेती की जाएगी। इसमें रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। फसलों की उपज बढ़ाने और संरक्षण के लिए जैविक उत्पादों का प्रयोग किया जाएगा। ताकि, लीचिंग रिसाव के जरिये रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का जहर नदियों को प्रदूषित न कर सके।
गंगा के तटवर्ती 27 जिलों में पहले से ही नमामि गंगे योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो गंगा किनारे एक हजार से अधिक गांवों में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इसे बढ़ावा देने के लिए 54 जिलों में परंपरागत कृषि विकास योजना चलाई जा रही है। निराश्रित गोवंश से सबसे प्रभावित बुंदेलखंड को प्राकृतिक खेती के लिहाज से उत्तर प्रदेश का हब बनाने का उद्देश्य है।
करीब पांच हजार क्लस्टर्स में 18 हजार से अधिक किसान लगभग 10 हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनमें नमामि गंगा योजना के तहत करीब 3300 क्लस्टर्स में छह लगभग 6500 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती हो रही है। इस खेती से जुड़े किसानों की संख्या एक लाख से अधिक है।