लखनऊ। नेशनल पीजी कॉलेज में मंगलवार को वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से ‘पादप जैव विविधता एवं चुनौतियां’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), सीएसआईआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. केएम प्रभुकुमार ने कहा कि पौधों की विविधता पारिस्थितिक संतुलन, मानव स्वास्थ्य और जीवन के अस्तित्व का आधार है। इसका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
उन्होंने पौधों की पहचान और नामकरण में वर्गीकरण विज्ञान (टैक्सोनॉमी) की भूमिका समझाई। कहा कि पौधों की सही पहचान के बिना उनके संरक्षण, अनुसंधान और औषधीय उपयोग की योजनाएं प्रभावी नहीं हो सकतीं। उन्होंने चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में वर्णित वनस्पतियों के पारंपरिक ज्ञान का उल्लेख करते हुए औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही आयुर्वेदिक औषधि दशमूल में इस्तेमाल होने वाली दस जड़ों के चयन और इसके पारंपरिक आधार की जानकारी दी।
डॉ. प्रभुकुमार ने कहा कि प्राकृतिक वनस्पतियों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते पादप संपदा का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम के समापन पर वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अविजीत चटर्जी ने जैव विविधता को पृथ्वी पर जीवन का आधार बताते हुए इसके संरक्षण की अपील की। इस दौरान विभिन्न विभागों के शिक्षक और बीएससी के प्रथम व द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।