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Lucknow News: लोक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान में होगी इतिहास की खोज

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नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह। अमर उजाला
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लखनऊ। इतिहास को केवल लिखित दस्तावेजों के जरिये ही नहीं, बल्कि लोक परंपराओं, मौखिक कथाओं, पुरातात्विक साक्ष्यों और पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से भी समझा जा सकता है। इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर नेशनल पीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दो और तीन नवंबर को किया जाएगा। प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी का विषय 'नैरेटिव्स बियॉन्ड टेक्स्ट्स : मटेरियल कल्चर, ओरल ट्रेडिशन्स एंड इंडिजिनस नॉलेज सिस्टम्स' रखा गया है।

प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह के अनुसार,  संगोष्ठी में देशभर के विद्वान, शिक्षक और शोधार्थी भारतीय संस्कृति, सामूहिक स्मृति और पीढ़ियों से चली आ रही ज्ञान परंपराओं के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। उद्घाटन सत्र में प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी मुख्य अतिथि होंगी। पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी, जबकि भारतीय मुद्रा विज्ञान सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. प्रशांत श्रीवास्तव मुख्य व्याख्यान देंगे।
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दो दिनों तक चलने वाले तकनीकी सत्रों में लोक आख्यानों, ऐतिहासिक स्मृतियों, पारंपरिक धातुकर्म, स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों और पारंपरिक वास्तुकला पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा डिजिटल अभिलेखागार, वित्तीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।
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समापन सत्र में विनोबा भावे विश्वविद्यालय, झारखंड के कुलपति प्रो. सीबी शर्मा और उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्त्व विभाग की निदेशक रेनू द्विवेदी मौजूद रहेंगी। संगोष्ठी में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को सतत विकास, शिक्षा और तकनीकी नवाचार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

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