हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में शनिवार को दर्शन करते लोग। -संवाद
लखनऊ। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के साथ ही हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। हनुमान जी का जन्म मेष लगन स्वाति नक्षत्र में मंगलवार को हुआ था। 18 अक्तूबर को हनुमान जयंती पर बजरंग बली के मंदिर में गुड़-चने का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।
कृष्णानगर स्थित आशुतोष महादेव मंदिर के पुजारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि हनुमान जी शिव के अवतार हैं और कलयुग में सर्वाधिक पूजे जाने वाले देवता है। इनकी पूजा तत्काल फल देने वाली होती है। हनुमान भक्त इस दिन व्रत रख कर राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का पूजन कर भजन-कीर्तन करते हैं। इस दिन व्रत रखकर रामचरित मानस के सुंदरकांड का पाठ लाभदायक होता है। लाल वस्त्र, लाल चंदन, लाल फूल, सिंदूर चमेली के तेल का लेप, बेसन के लड्डू और बूंदी से वे शीघ्र प्रसन्न होते है। हनुमान जी की पूजा से जीवन में बल, बुद्धि, साहस, संकटों पर विजय, निरोगिता प्राप्त होती है और मंगल ग्रह संबंधी दोष दूर होते हैं।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन सूर्याेदय के पूर्व उठकर तिल के तेल से मालिश करके स्नान करना चाहिए। उसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त दीपक जलाकर लंबी आयु और आरोग्य की प्रार्थना करें। समृद्धि के लिए प्रार्थना करें और शाम को महालक्ष्मी और कुबेर के लिए दीपक प्रज्ज्वलित कर उनके मंत्रों का जाप करें। इस दिन शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करना चाहिए।
हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में शनिवार को दर्शन करते लोग। -संवाद
हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में शनिवार को दर्शन करते लोग। -संवाद
हजरतगंज स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में शनिवार को दर्शन करते लोग। -संवाद