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स्पीड ब्रेकर हटाए नहीं और मानवाधिकार आयोग को भेज दी रिपोर्ट

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लखनऊ। राजधानी के नगर निगम क्षेत्र की कॉलोनियों में अवैध रूप से बना लिए गए स्पीड ब्रेकर हटाने की झूठी रिपोर्ट राज्य मानवाधिकार आयोग को भेज दी गई। अब आयोग ने खुद के पास आईं नई शिकायतें नगर निगम को भेजी हैं। मुख्य सचिव और उप सचिव नगर विकास लखनऊ नगर निगम के सभी जोन के अधिकारियाें से प्रमाण पत्र लेकर आयोग को रिपोर्ट देंगे। आयोग के सदस्य ओपी दीक्षित ने कहा कि पांच फरवरी को आदेश कर मुख्य सचिव को लखनऊ से अवैध स्पीड ब्रेकर हटवाने के लिए कहा गया था। छह मार्च को नगर आयुक्त से जांच रिपोर्ट मिली। इसमें स्कूल, अस्पताल व अन्य सार्वजनिक स्थलों को छोड़कर बाकी जगहों से स्पीड ब्रेकर हटाने की बात कही। वहीं, आयोग के सामने आईं शिकायतों से पता चला कि अब भी कॉलोनियों के अंदर संकरी सड़कों तक पर स्पीड ब्रेकर हैं। नौ मीटर से भी कम चौड़ाई वाली सड़कों पर भी ब्रेकर बने हैं। आयोग ने गोमतीनगर के विकासखंड, विरामखंड, विवेकखंड, विशालखंड का विशेष रूप से जिक्र किया है। सभी शिकायतें भी आयोग ने अधिकारियों को भेजी हैं। आयोग के सदस्य ने आदेश दिया है कि मुख्य सचिव और उप सचिव नगर विकास स्पीड ब्रेकर हटवाते हुए 22 जुलाई तक रिपोर्ट दें। आयोग ने लखनऊ में स्पीड ब्रेकरों की समस्या को स्वत: संज्ञान लेते हुए उठाया है। हादसों का सबब बन रहे ब्रेकर शहर की कई कॉलोनियों में लोगों ने खुद अवैध तरीके से स्पीड ब्रेकर बना लिए हैं। एक ओर जहां इनकी ऊंचाई भी तय मानक से अधिक कर दी गई है, वहीं नौ मीटर से कम चौड़ाई वाली सड़कों पर भी ब्रेकर बना दिए गए हैं। इतना ही नहीं इन्हें बनाने के लिए संबंधित विभागों से अनुमति तक नहीं ली जाती। ऐसे में अकसर इन ब्रेकरों पर तेज रफ्तार गाड़ियां अनियंत्रित हो जाती हैं और हादसे हो जाते हैं।
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