नरेश शर्मा लखनऊ। सीमा पर भारतीय सैनिकों की शहादत पर राजधानी में हर तरफ चीन के प्रति गुस्सा है। कारोबारी भी चीन की कायराना हरकत पर आग बबूला हैं। नाराज व्यापारियों ने अपने तरीके से इस गुस्से का इजहार भी किया है। उन्होंने चीनी सामान के बहिष्कार का अल्टीमेटम भी दिया है। पर, हकीकत यह भी है कि कि लखनऊ में सालाना करीब 7000 करोड़ के चीनी सामान खप जाते हैं। कारोबारियों के ये आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से चीन ने हमारे बाजारों पर भी कब्जा कर लिया है। कॉस्मेटिक्स, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, खिलौने व सजावटी आइटम्स के कारोबार में चीन में बनी चीजों की बड़ी हिस्सेदारी है। व्यापारी नेता अतुल कुमार जैन का तो यहां तक अनुमान है कि सभी ट्रेड को मिलाकर सालाना करीब 10 हजार करोड़ का कारोबार चीन के साथ यहां होता है। राजधानी के बहुत से कारोबारी सीधे चीन के शहरों से माल मंगाते हैं, जिनके कंटेनर मुंबई में उतरते हैं। महिलाओं की पर्स से हजार करोड़ निकाल लेता है चीन अमीनाबाद में कॉस्मेटिक्स के होलसेल कारोबारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ में सालाना 2500 करोड़ रुपये की लिपस्टिक, पाउडर, परफ्यूम, क्रीम सहित अन्य सौंदर्य प्रसाधन बिक जाते हैं। इसमें से 40 फीसदी यानी करीब 1000 करोड़ के आइटम चीन के होते हैं। खिलौनों पर 600 करोड़ तोे सजावट पर 1200 करोड़ खर्च नाका के होलसेल कारोबारी नीलेश अग्रवाल बताते हैं कि राजधानी व आसपास के जिलों के लोग चीन में बने खिलौनों पर 600 करोड़ और सजावटी आइटम पर सालाना 1200 करोड़ खर्च करते हैं। बच्चों के जितने भी खिलौने मार्केट में सजे हैं वह सब चीन में ही तैयार होते हैं। घरों की साज सज्जा के लिए खरीदे जाने वाले आइटम, लाइट, लैंप, झूमर, फाउंटेन, शो पीस, फर्नीचर सब में ज्यादातर चीन के होते हैं। हर महीने बिकने वाले 10000 एलईडी टीवी में 4000 चीन के होते हैं नाका हिंडोला व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत ने बताया कि राजधानी में हर महीने 10000 एलईडी टीवी बिकते हैं। इनमें 6000 तो ब्रांडेड कंपनियों के, जबकि 4000 चीन में तैयार किए होते हैं। इसके अतिरिक्त चीन में बनाए गए माइक, स्पीकर, और कई तरह की एसेसरीज भी खूब बिकती हैं, जिनका लखनऊ में सालाना 300 करोड़ का कारोबार होता है। सस्ते मोबाइल फोन के बाजार पर चीन का कब्जा लखनऊ मोबाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोहर बताते हैं कि जितने भी सस्ते मोबाइल बिक रहे हैं वह चीन के हैं। मोबाइल की 90 फीसदी एसेजरीज भी चीन से ही सप्लाई हो रही है। चीनी मोबाइल और एसेसरीज की राजधानी के बाजार में 70 फीसदी हिस्सेदारी है। भारतीय उद्यमियों के चीन में बने हैं प्रोसेस हाउस लखनऊ कपड़ा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी बताते हैं कि चीन में भारतीय उद्यमियों ने कपड़े के प्रोसेस हाउस बना रखे हैं। इसकी वजह कपड़े की कम लागत में उसकी बेहतरीन फिनिशिंग होना है। लखनऊ में सालाना जितना कपड़ा बिकता है, उसमें 30 फीसदी चीन का तैयार हुआ शामिल होता है, जो लगभग सालाना 1200 करोड़ रुपये का बिकता है, जिसमें रेडीमेड भी शामिल है। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये के घर की सजावट के पर्दे, बेड शीट, चादर आज भी बिक जाते हैं। बाजारों में चीनी सामान की हिस्सेदारी का प्रतिशत कपड़ा 30 सजावटी आइटम 80 इलेक्ट्रिकल 75 इलेक्ट्रॉनिक 70 मोबाइल 70 खिलौने 80 एलईडी टीवी 40 कॉस्मेटिक्स 40 प्रमुख ट्रेड का कारोबार ट्रेड रुपये (करोड़ में) कपड़ा 1500 सजावटी आइटम 1200 इलेक्ट्रिकल्स 1000 कास्मेटिक 1000 इलेक्ट्रॉनिक्स 500 मोबाइल्स 650 खिलौने 600 एलईडी टीवी 300 लैपटॉप, कंप्यूटर 250 कुल 7000 नोट : आंकड़ों का स्रोत ट्रेड कारोबारी