लोहिया पथ पर हैदर कैनाल नाले की 44 हजार वर्ग फीट जमीन को अब पर्यटन स्थल की तरह विकसित नहीं किया जाएगा। इसके लिए शासन से मिले दस करोड़ के बजट को भी अब नगर निगम नाले में खपाने जा रहा है। जबकि यह पैसा नगर निगम को कर्ज के तौर पर शासन से मिला था। इसके लिए हैदर कैनाल सौंदर्यीकरण की योजना को ही बजट की कमी का हवाला देकर बदल दिया गया है।
तीन साल पहले तत्कालीन सपा सरकार में लोहिया पथ पर चिड़ियाघर के पीछे और डीजीपी कार्यालय मोड़ तक जाने वाली हैदर कैनाल और उससे लगी जमीन को गोमती तटबंध सौंदर्यीकरण की तर्ज पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनी थी। इसको लेकर शासन व्यय वित्त समिति ने करीब 80 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी भी दी थी। योजना पर काम शुरू करने के लिए उस समय 10 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया गया था। चूंकि इस योजना में एसटीपी का निर्माण भी जुड़ा था और इसका प्रोजेक्ट उस समय मंजूर नहीं हुआ था तो काम अटका रहा। करीब दो साल पहले एसटीपी निर्माण को भी मंजूरी मिली और करीब 300 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया। एसटीपी का काम तो बीते साल शुरू हो गया, मगर पार्क बनाने का काम अटका रहा। पार्क बनाने के लिए बजट कर्ज के तौर पर निगम को शासन ने दिया है। उसके बाद भी नगर निगम प्रशासन अब उसे लौटाने के बजाय उसे नाला निर्माण के नाम पर खपाने जा रहा है, जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
यह थी सौंदर्यीकरण योजना
योजना थी कि लोहिया पथ का जो हिस्सा गंदगी और झाड़ियों से भरा दिखता है, उसका नजारा बदल जाएगा। वहां पर नाले की जगह पतली झील दिखेगी। झरना दिखेगा, छोटे-छोटे ब्रिज दिखेंगे। सौंदर्यीकरण योजना के तहत वहां पर बच्चों के मनोरंजन के इंतजाम, टहलने के लिए पाथ वे बनने थे। नाले के पानी को शोधित करने केलिए आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कृत्रिम जलाशय बनाने की भी योजना थी।
अब इस पर खर्च किया जाएगा पैसा
हैदर कैनाल के जिस हिस्से में पहले सौंदर्यीकरण किया जाना था, वहां अब पार्क के बजट से नाले की रिटेनिंग वाल बनाई जाएगी। सड़क से नाले के नीचे तक गाड़ियां आ जा सकें इसके लिए रैम्प बनाया जाएगा। मजदूरों के आने-जाने के लिए सीढ़ियां बनाई जाएंगी। इसको लेकर जोनल अभियंता डीएस त्रिपाठी कहते हैं कि अभी हैदर कैनाल नाले की सफाई बहुत मुश्किल होती है। मशीन और गाड़ियों को नीचे तक ले जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। यह काम होने से हैदर कैनाल नाले की सफाई सही हो जाएगी।
डिजाइन भी बदली
एसटीपी की जगह भी बदल दी गई है। पहले एसटीपी को डीजीपी पुलिया के दाहिनी तरफ बनाया जाना था, जबकि यह अब बाईं ओर बनाया जा रहा है। डिजाइन क्यों बदली गई, इसको लेकर अधिकारी सही जानकारी देने के बजाय मामले को दबाए हुए हैं।
...आखिर क्यों बढ़ाया जा रहा दस करोड़ का बोझ
नगर निगम पहले से करीब 300 करोड़ के कर्ज में है। इसके अलावा सरकार भी एसटीपी संचालन के नाम पर हर महीने करीब 10 करोड़ रुपये की कटौती 14वें वित्त से मिलने वाले बजट में कर रही है। ऐसे में दस करोड़ कर्ज का बोझ क्यों बढ़ाया जा रहा है। जानकार इसके पीछे कमीशनबाजी को वजह मान रहे हैं। जानकार यह भी कहते हैं यदि नाला निर्माण जरूरी है तो उसके लिए अवस्थापना व 14वें वित्त से भी बजट पास कराया जा सकता है।
नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता से मांगेंगे रिपोर्ट
जिस प्रोजेक्ट के लिए शासन ने बजट दिया था यदि उस पर अब काम नहीं होना है तो उसे वापस कर दिया जाए। कर्ज तो नगर निगम को लौटाना ही होगा। यदि बजट को किसी दूसरे काम पर खर्च किया जाना है तो उसकी जानकारी अधिकारियों को देनी चाहिए थी। इस बारे में नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता से रिपोर्ट तलब की जाएगी।
- संयुक्ता भाटिया, महापौर