सूबे के गांवों के विकास के लिए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल
डवलपमेंट (नाबार्ड) ने 1,21,618 करोड़ रुपये के बजट का आकलन किया है।
नाबार्ड के मुताबिक उत्पादकता बढ़ाने, कृषि में निजी पूंजी निर्माण,
बुनियादी सुविधाओं, समावेशी विकास व वित्तीय समावेशन के लिए यह बजट आवश्यक
है।
शुक्रवार को यहां एक होटल में आयोजित नाबार्ड की स्टेट क्रेडिट सेमिनार
में यह बात अधिकारियों ने कही। सेमिनार का शुभारंभ कृषि उत्पादन आयुक्त
आलोक रंजन ने किया।
इस दौरान उन्होंने राज्य फोकस पेपर का लोकार्पण भी
किया। नाबार्ड स्टेट फोकस पेपर के मुताबिक 1,21,618 करोड़ रुपये में से
88,353 करोड़ कृषि के लिए हैं।
इसी राशि में से 71,515 करोड़ रुपये किसान
क्रेडिट कार्ड के रूप में अल्प अवधि के लिए कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति के
लिए उपयोग होंगे।
योजना में 15,455 करोड़ की राशि गैर कृषि क्षेत्र और
17,808 करोड़ रुपये अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च की जाएगी।
मालूम हो कि स्टेट फोकस पेपर राज्य के जिलों से जुड़ी खामियों का लेखा-जोखा
रखता है।
सेमीनार में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक केके गुप्ता ने कहा कि
राज्य सरकार व बैंक के द्वारा सकारात्मक सहयोग के विस्तार के लिए कृषि नीति
पर दोबारा विचार किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से सामान्य
बजट में अलग से कृषि के लिए बजट का प्रावधान किए जाने की जरूरत पर जोर
दिया।