बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि उनकी ओर से बिजली शहीद मस्जिद के पास भूमि देने का सुझाव दिया गया था। यहां पहले से ही मस्जिद थी लिहाजा कोई विवाद नहीं होता। पुरानी मस्जिद को भव्यता देने के साथ हिंदू-मुस्लिम सभी के लिए अस्पताल व स्कूल का प्रस्ताव किया था। लेकिन सरकार ने अयोध्या से 25 किमी. दूर जमीन देकर न्याय नहीं किया है।
जिस मस्जिद के एवज में फैसला आया, इसके लिए आसपास ही भूमि मिलनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन नहीं हुआ है। उतनी दूर अयोध्या के लोग नमाज कैसे पढ़ेंगे।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि राज्य सरकार ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन जिस स्थान पर दी है वहां मस्जिद बनाने का कोई औचित्य नहीं होगा। मुस्लिम समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। हमने तो पंचकोसी और चौदहकोसी के बाहर उदया कॉलेज के पास चक्रतीर्थ इलाके में पांच एकड़ भूमि देने का सुझाव दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट जाकर उपयुक्त स्थान देने के लिए न्याय मांगने का ही रास्ता बचा है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड यह जमीन स्वीकार करेगा तो किसके लिए।