लखनऊ। दस रुपये किलो में अब तक सब्जी मंडी में बिक रहे खरबूजे ने बुधवार को अचानक रंग बदल दिए। सुबह 50 रुपये किलो से शुरू हुए दाम 250 रुपये तक पहुंच गए। फल विक्रेताओं का कहना है कि वट सावित्री व्रत के पूजन के लिए खरबूजे की ज्यादा मांग है। वहीं, कुछ दिनों से कम उपलब्धता होने से भी कीमत ज्यादा है।
भूतनाथ सब्जी मंडी के फल विक्रेता सलाहुद्दीन कहते हैं कि सुबह 50 रुपये से बिक्री शुरू हुई थी, शाम को बाजार बंद होते-होते 250 रुपये तक में लोग खरीद कर ले गए। राजाजीपुरम की अर्चना मिश्रा बताती हैं कि 100 रुपये का एक खरबूजा खरीदा है। जानकीपुरम की चमन कहती हैं कि निशातगंज से लेकर यहां तक देख लिया, कहीं खरबूजा नहीं मिला। रीना कहती हैं कि 140 रुपये किलो में बहुत मुश्किल से एक खरबूजा मिला है, वह भी बस काम चलाने लायक है। हालांकि, चौक निवासी पारुल, उषा व अन्य कहती हैं कि पुराने शहर में एक खरबूजा 50 रुपये का मिला है। दुबग्गा फलमंडी के आढ़ती आरिफ ने बताया कि 45 रुपये किलो थोक में खरबूजा बिका है।
इधर, 100 तक पहुंचे दशहरी के भाव
कर्फ्यू हटते ही दशहरी के भाव भी बढ़ गए। कारोबारी कहते हैं कि दो दिन पहले दशहरी छह से 24 रुपये किलो तक में बिक रहा था, इससे लागत भी नहीं निकल रही थी। फल मंडी में 15 से 35 रुपये किलो में मिल रहे आम के फुटकर बाजार में दाम 100 रुपये तक पहुंच गए हैं। पिछली बार से डरे व्यापारियों ने इस बार आम की टूट 18 मई से शुरू कर दी थी। जून आते-आते 60 फीसदी आम मंडियों में बिक चुका है। अब आम की कमी है और खाने के शौकीन ज्यादा है, यही वजह है कि कीमत बढ़ी है। कारोबारी संजीत सिंह कहते हैं कि हालात सामान्य रहे तो नुकसान की भरपाई हो जाएगी और बागबानों को आम की फसल का अच्छा दाम मिल पाएगा। आढ़ती राजेश यादव कहते हैं कि मुंबई, पंजाब और जालंधर की मंडियों के अलावा जम्मू-कश्मीर से भी दशहरी की खूब मांग आ रही है। संजय सिंह, रामगोपाल व अन्य कारोबारी कहते हैं कि डाल का दशहरी बाजार में आ चुका है। अब जी भर कर इसका स्वाद चखा जा सकता है। आम की खूबसूरती पर न जाएं, क्योंकि यह पाल का हो सकता है। डाल के आम की पहचान यही है कि उसमें चेप जरूर निकलती है, जो हल्का उसे बदरंग करती है।