ग्राहक ने बुकिंग के 20 मिनट बाद निरस्त की थी ट्रिप, सीतापुर में गोमती में मिला लापता टैक्सी चालक का शव
गोसाईंगंज के सिटकिहा कला गांव निवासी ओला कैब चालक मुकेश पाल (28) की गला दबाकर हत्या के बाद कार लूट ली गई।
बदमाश उसका शव सीतापुर के संदाना गांव के पास गोमती नदी में फेंककर भाग निकले। उधर, मुकेश के घर न पहुंचने से परेशान परिवारीजनों ने खोजबीन की तो शव मिलने की सूचना से कोहराम मच गया।
शुक्रवार दोपहर परिवारीजनों के साथ करीब 500 ग्रामीण शव लेकर गोसाईंगंज थाने पहुंचे और धरना-प्रदर्शन कर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया।
इंस्पेक्टर विजय कुमार सिंह ने बताया कि मुकेश पाल के पास स्विफ्ट कार थी, जिसे वह ओला कंपनी के लिए चलाता था। बुधवार सुबह करीब दस बजे वह घर से कार लेकर निकला था।
रात 10.30 बजे छोटे भाई अनुज ने फोन करके घर आने के बारे में पूछा। मुकेश ने कहा कि तुम लोग खाना खाकर सो जाओ। उसे अभी डेढ़ घंटे लगेंगे।
रात 12 बजे तक मुकेश नहीं आया तो अनुज ने फिर कॉल की तो उसके चारों मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिले। उसके करीबियों से संपर्क करने पर भी कुछ पता नहीं चला।
बृहस्पतिवार सुबह मुकेश की खोजबीन शुरू हुई। अनुज का कहना है कि वह ओला कंपनी के ऑफिस गया तो मुकेश की अंतिम लोकेशन मड़ियांव के छठामील में मिली।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि मुकेश को बुधवार रात 10.25 बजे छठामील के पास ही एक बुकिंग दी गई थी। हालांकि, 20 मिनट बाद ही ग्राहक की तरफ से बुकिंग निरस्त करा दी गई थी।
परिवारीजन खोजबीन करते हुए इटौंजा टोल प्लाजा पहुंचे तो वहां मुकेश की कार रात 11.49 बजे टोल क्रॉस करते और करीब पौने दो घंटे बाद 1.33 बजे वापस आते दिखी।
टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने बताया कि उक्त कार के चालक ने आने-जाने की पर्ची कटवाई थी। इसके बाद अनुज ने गोसाईंगंज थाने में मुकेश की गुमशुदगी का केस दर्ज कराया।
परिवारीजन मुकेश की तलाश कर ही रहे थे कि सीतापुर के सिधौली थाना में तैनात एक रिश्तेदार ने संदाना गांव के पास नदी में किसी युवक का शव मिलने की सूचना दी।
रिश्तेदार का कहना था कि मृतक का हुलिया मुकेश जैसा ही है। अनुज ने व्हाट्सएप पर फोटो मंगाया तो शव मुकेश का ही निकला। रोते-पीटते परिवारीजन सीतापुर पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गोसाईंगंज थाने पहुंचे।
परिवारीजनों के साथ करीब 500 लोग थे। थाना पर शव रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। गोसाईंगंज पुलिस ने गुमशुदगी को हत्या व लूट की धारा में बदल दिया है।
कैंसर से जंग जीतकर चला रहा था ओला कैब
मुकेश पाल के परिवारीजनों ने बताया कि उसे कैंसर था। कच्ची गृहस्थी में ऐसी खतरनाक बीमारी से लोग टूट जाते हैं, लेकिन मुकेश ने कैंसर से लड़ाई लड़ी। उसने डटकर इलाज कराया और परहेज किया। हालांकि, इस दौरान वह आर्थिक रूप से टूट गया। ठीक होने के बाद ही उसने लोन लेकर कार खरीदी दी थी।
पिता बोले, घर संभालने वाला चला गया
मुकेश अपने माता-पिता का सबसे बड़ा बेटा था। उसके पिता शिवराज ने बताया कि वही परिवार को संभालता था और घर चलाता था। उसकी मौत की खबर सुनते ही मां राजरती व पत्नी रेखा बेहोश होकर गिर पड़ीं। शिवराज ने बताया कि मुकेश के अलावा उनके दो बेटे आशीष व अनुज हैं। आशीष ने इसी वर्ष इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है और अनुज अभी पढ़ रहा है। मुकेश के साढ़े चार साल का बेटा अर्पित और तीन साल की बेटी लाडो है।
बेटे के दिल में है छेद, कैसे होगा इलाज
अनुज ने बताया कि भतीजे अर्पित के दिल में छेद है। मुकेश की मौत के बाद परिवारीजनों को उसके इलाज की चिंता खाए जा रही है। पत्नी रेखा ने कहा कि इलाज में काफी खर्चा आएगा। अब घरेलू खर्चे, बच्चों की पढ़ाई के साथ ही बेटे के उपचार के लिए कहां से इंतजाम होगा? सब इसी को लेकर परेशान हैं। हालांकि, एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी ने आयुष्मान योजना के तहत अर्पित का उपचार कराने का आश्वासन दिया है।
जमीन का पट्टा, पारिवारिक लाभ योजना, फीस माफी समेत अन्य सुविधाएं मिलेंगी
मुकेश के परिवारीजनों ने 50 लाख रुपये मुआवजा, पत्नी को सरकारी नौकरी, ओला कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और हत्यारों की गिरफ्तारी समेत अन्य मांगे रखीं। एसडीएम ने मुकेश के ग्राम प्रधान से परिवारीजनों के नाम पर एक बीघा जमीन का पट्टा करने, परिवारीजनों को पारिवारिक लाभ योजना, आयुष्मान योजना, बच्चों की फीस माफ कराने, सरकारी आवास दिलाने और सर्वहित बीमा लाभ योजना के तहत पांच लाख रुपये की राशि दिलाने का आश्वासन दिया है।