लखनऊ। राजधानी की बाहरी सीमा से पांच किमी के दायरे में स्थित ईंट-भट्ठों का सर्वेक्षण करने के मामले में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बताया है कि नगर निगम की ओर से जवाब नहीं दिया जा रहा है। उधर, नगर निगम की ओर से कहा गया कि टीम बनाई गई है, पर कुछ कारणों से सर्वेक्षण नहीं हो सका। इस पर कोर्ट ने नगर निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारियों को शुक्रवार को पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तीन अप्रैल को तय करके अफसरों से सर्वेक्षण न हो पाने पर स्पष्टीकरण भी मांगा है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश दुर्गेश कुमार सिंह की वर्ष 2010 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। 14 जनवरी को ही कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया था। इसमें कहा था कि वह जिम्मेदार अधिकारियों को नामित करे जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ सर्वेक्षण करें। इसके बाद नया हलफनामा दाखिल कर ईंट-भट्ठों बनाने की अनुमति की स्थिति तथा संबंधित प्राधिकारियों की ओर से दी गई स्वीकृतियों का विवरण प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि संचालन की अनुमति की अवधि पांच वर्ष होती है। नियम 2012 के अधिसूचित होने के बाद ऐसे भट्ठों के संचालन की अनुमति के नवीनीकरण पर विचार करना जरूरी है।