लखनऊ। समय से गृहकर जमा करने वाले 50 हजार से अधिक भवनस्वामियों के पुराने बिलों में की गई वृद्धि पर नगर निगम रोक लगा सकता है। जीआईएस सर्वे की आड़ में 2022 से पहले का गृहकर बढ़ाए जाने से शिकायतों की बाढ़ आ गई थी। इस पर महापौर के निर्देश के बाद निगम प्रशासन ने जांच के लिए समिति गठित कर दी है, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी।
गृहकर समाधान शिविरों और रोजमर्रा की कार्रवाई के दौरान भवनस्वामियों ने कहा कि नियमित कर जमा करने के बावजूद उनके बिलों में भारी बकाया दिखाया जा रहा है। अधिकतर मामलों में जीआईएस सर्वे के बाद 2010 और 2014 से गृहकर पुनरीक्षित कर दिया गया, जिससे कर कई गुना बढ़ गया। भवनस्वामियों का तर्क है कि अगर कर बढ़ाना था तो उस समय बढ़ाया जाता, अब 10-15 साल बाद पुनरीक्षण का क्या अर्थ है।
विवाद बढ़ने पर नगर निगम ने पहले भी ऐसे मामलों में बकाया पर ब्याज माफ करना शुरू किया था और करीब 10 वर्ष पूर्व कार्यकारिणी में प्रस्ताव भी पास हुआ था, लेकिन पीछे से पुनरीक्षण की प्रक्रिया बंद नहीं हुई। बढ़े बिलों के चलते लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पिछले सप्ताह संपूर्ण समाधान दिवस में महापौर ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था।
पीछे से गृहकर बढ़ाना गलत : महापौर
महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि गृहकर पुनरीक्षण का दायित्व राजस्व निरीक्षकों का है। यदि उन्होंने समय से यह कार्य नहीं किया तो गलती उन्हीं की है। अब व्यवस्था में सुधार करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि 2022 के पहले किसी भी भवन का गृहकर पुनरीक्षित नहीं किया जाएगा। जिस भवन का पुनरीक्षण होगा, वह 2022 से ही प्रभावी माना जाएगा।
नियम : हर दो साल में गृहकर पुनरीक्षित होना चाहिए
नगर निगम अधिनियम के अनुसार, गृहकर की दरें हर दो साल में बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन 2010 के बाद से यह प्रक्रिया ठप है। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण 2010 के हिसाब से भी सभी भवनों का पुनरीक्षण नहीं हो पाया। अब जीआईएस सर्वे के बाद निगम कर्मी 2010 से बकाया पुनरीक्षण कर रहे हैं, जिससे कई मकानों का गृहकर अचानक कई गुना बढ़ गया है।
यह बनी समिति
अपर नगर आयुक्त ललित कुमार की अध्यक्षता में बनी समिति में मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी महामिलिंद लाल, मुख्य नगर लेखा परीक्षक बनवारी लाल, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह व विनय राय, प्रभारी विधि नंद किशोर को सदस्य नामित किया गया है। समिति नगर निगम अधिनियम 1959, संपत्ति कर नियमावली 2000 और अन्य नगर निगमों की व्यवस्था का अध्ययन कर कर निर्धारण की प्रभावी तिथि, ब्याज माफी और संबंधित प्रक्रियाओं पर अपनी रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपेगी।
Iगृहकर 2022 से पहले पुनरीक्षित न किया जाए, इसके निर्देश दे दिए गए हैं। जब जीआईएस 2022 में हो चुका है, तो पीछे से कर बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं। लोगों को राहत मिले, इसी उद्देश्य से सुधार कराया जा रहा है।I
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- सुषमा खर्कवाल, महापौरI