नगर निगम के पास बजट खत्म हो गया है। ऐसे में सफाई और दूसरे कामों को सुचारु रखने के लिए नगर आयुक्त अजय द्विवेदी मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने एलडीए को भी ऐसा एक पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि गृहकर जमा कर सहयोग करें, हमारे पास नगरीय सुविधाओं के काम कराने के लिए बजट नहीं है।
एलडीए सचिव पवन गंगवार को भेजे गए पत्र में नगर आयुक्त ने लिखा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के रोकथाम के लिए शहर में सैनिटाइजेशन, कंटेनमेंट जोन बनाने, अंत्येष्टि व्यवस्था का काम किया जा रहा है। नगरीय सुविधाओं का दायित्व भी नगर निगम का है। इन सभी के लिए नगर निगम का एकमात्र आय का प्रमुख स्रोत गृहकर ही है। लॉकडाउन की वजह से विभिन्न स्रोतों से आय शून्य ही है। जबकि, महामारी से लड़ने के लिए संसाधनों की व्यवस्था के लिए पैसों की जरूरत है।
नगर आयुक्त ने सचिव से कहा है कि आपसे सहयोग की अपेक्षा है। जिससे शहर की सफाई, सैनिटाइजेशन व अन्य नगरीय सुविधाओं को सुचारु रखा जा सके। एलडीए की तीन बिल्डिंग का बिल भी साथ में भेजा गया है जोकि करीब 6.63 लाख रुपये है। नगर निगम ने कहा है कि 31 जुलाई तक 10 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। एलडीए इसका भी फायदा उठा सकता है। एलडीए सचिव ने अब अपने अधिकारियों को गृहकर के भुगतान करने के निर्देश दे दिए हैं।
इन बिल्डिंगों का भेजा गया बिल
ज्योतिबा फुले मल्टीलेवल पार्किंग - 5,39,784 रुपये
राममनोहर लोहिया पार्टी लॉन - 70,227 रुपये
अमृतलाल नागर सभागार - 53,703 रु पये
सरकारी विभागों पर 200 करोड़ रुपये बकाया
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में मौजूद सरकारी विभागों पर ही गृहकर का करीब 200 करोड़ रुपये बकाया है। यह गृहकर ही अगर जमा हो जाए तो काफी हद तक मदद हो सकती है। दूसरे विभागों को भी इस तरह के पत्र नगर निगम भेज रहा है।