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मुलायम का ऐलान, सपा कोई गठबंधन नहीं करेगी, अकेले लड़ेगी चुनाव

Sat, 12 Nov 2016 02:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
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सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, सपा किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी। राष्ट्रीय सम्मेलन का स्पष्ट प्रस्ताव है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी।
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सपा मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब मुलायम ने कहा कि कोई दल अगर सपा में विलय को तैयार होगा, तो करेंगे, कुछ का कर भी लिया है। उनका इशारा बाहुबली मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल की तरफ था।

मुलायम ने जब यह घोषणा की, तब प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव उनके बराबर में ही बैठे थे। सपा में गठबंधन की पैरोकारी उन्होंने ही शुरू की थी। शिवपाल ने दावा किया था कि वे भाजपा को रोकने के लिए चरण सिंह वादी, लोहियावादी व गांधीवादियों को एक साथ लाएंगे और इसके लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।
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सीएम अखिलेश नहीं चाहते थे गठबंधन

सीएम अखिलेश यादव किसी से भी गठबंधन के पक्ष में नहीं थे। वे अपनी सरकार के काम पर जनादेश मांगने की बात कहते रहे हैं। हालांकि मुलायम-शिवपाल की सक्रियता के मद्देनजर उन्होंने पहले अध्यक्ष के फैसले को मानने की बात कही, फिर बुधवार को कहा कि गठबंधन हुआ, तो हम 300 सीटें जीतेंगे।

लालू-नीतीश की पार्टी से थी गठबंधन की अटकलें
समाजवादी पार्टी के कांग्रेस, रालोद व जदयू से गठबंधन करके चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन, मुलायम ने एक सवाल के जवाब में साफ कर दिया कि लालू यादव या नीतीश कुमार की पार्टी से कोई गठबंधन नहीं होगा।
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'सपा ने ही की विलय की पहल, उसी ने ठुकराया भी'

मुलायम सिंह यादव व नीतीश कुमार - फोटो : amar ujala
जद(यू) के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि पिछले दिनों गठबंधन की पहल सपा ने की थी। बिहार चुनाव से पहले कई दलों के विलय का प्रस्ताव भी सपा ने ही ठुकराया था। तब मुलायम को पार्टी और संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष चुन लिया गया था।

उन्होंने कहा कि हमारा अब भी मानना है कि यूपी में भाजपा को अकेले दम पर कोई भी दल नहीं हरा सकता। इसके लिए समान विचार वाले दलों का साथ आना जरूरी है।

त्यागी ने कहा कि रजत जयंती समारोह के लिए मुलायम की ओर से शिवपाल ने निमंत्रण दिया था। अब मुलायम गठबंधन के बजाय मर्जर की बात कर रहे हैं। मर्जर का प्रस्ताव तो वे पहले ही ठुकरा चुके हैं। तब सपा के तत्कालीन महासचिव रामगोपाल ने कहा था कि मर्जर सपा के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
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