बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई हाशिम अंसारी की ओर से पैरवी न करने के ऐलान के बाद बड़े-बड़े सियासत दां के फोन घनघनाने शुरू हो गए हैं। अंदरखाने उन्हें मनाने की कोशिशें कई माध्यमों से चल रहीं हैं।
हाशिम किसकी बात मानते है, यह साबित करने की होड़ लगी हुई है। हालांकि हाशिम अंसारी ने सोमवार को फिर दोहराया कि वे सिर्फ महंत ज्ञानदास का गंगासागर से लौटने का इंतजार कर रहे हैं, उनके आते ही सुलह को लेकर देशभर में अभियान शुरू होगा।
अब राजनीति करने वालों को कोर्ट में मामला लटकाने के बजाय हल करने में साथ देना चाहिए। हाशिम अंसारी की हालत जीवन के अंतिम पड़ाव में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत रामचंद्रदास परमहंस जैसी हो गई है।
जैसे वे अंतिम सांस लेने से पहले मंदिर निर्माण शुरू करने पर अड़े थे, और देश में भाजपा सरकार रहते हुए उन्हें समझाने की जद्दोजहद चल रही थी, वैसे ही हाशिम की ओर से कोर्ट के बाहर मामला हल करने की जिद से पक्ष-विपक्ष के नेता नफा-नुकसान की गोटी बिठाने में जुटे हैं।
हाशिम अंसारी के मुताबिक छह दिसंबर को अपरान्ह में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें फोन किया था, फोन बेटे ने उठाया। सिर्फ दुआ-सलाम के बाद हाल-चाल की बात हुई। पैर में फ्रैक्चर की बात बताई।