कहा जाता है कि कभी अपनी ही बात मुसीबत बन जाती है। वही हाल इन दिनों सपा मुखिया का हो गया है। बेचारों ने एक बार यह क्या कह दिया, ‘सरकार में बड़ी ताकत होती है।
उसके पास सीबीआई है। वह जेल में डाल सकती है।’ मानों बैठे बिठाए हमेशा के लिए मुसीबत मोल ले ली। अब खाद्य सुरक्षा मुद्दे को ही ले लें।
प्रारंभ में इसका जोरदार विरोध करने का ऐलान करने वाले मुलायम के तेवर एक बार फिर ढीले पड़ते दिख रहे हैं। चूंकि सपा मुखिया ने खुद सीबीआई के डर की बात कही है तो विपक्ष की तरफ से ‘डील’ के आरोप शुरू हो गए हैं।
सपाई चाह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में धीरे-धीरे वक्त घटता जा रहा है। लड़ना कांग्रेस के ही खिलाफ है। इसलिए मैदान में अब लड़ाई शुरू कर दी जाए। पर, कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए समर्थन वापसी जरूरी है।
जो स्थिति है उसमें समर्थन वापसी से कांग्रेस का कुछ बिगड़ता नहीं दिख रहा है। सपा हटती है तो जद (यू) सहारा देने को तैयार खड़ा है। बेचारे करें तो क्या करें। दुविधा में फंसे हैं। सिर्फ जुबानी जंग की कोशिश कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा पसोपेश में प्रत्याशी हैं। इंतजार उस दिन का है जब नेता की तरफ से वास्तव में संकेत मिलेगा- ‘अब मैदान में उतरना जरूरी है।’