यूं तो मऊ जिले की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा-भासपा, सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच कांटे की टक्कर है, पर मुख्तार फैक्टर मुकाबले को थोड़ा दिलचस्प बना रहा है।
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यही वजह है कि कोई पार्टी दावा चाहे जो करे, पर उसके प्रत्याशी मतदाताओं को अपनी ओर मोड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। वे जानते हैं कि प्रचार में जरा सी ढिलाई भारी चूक साबित हो सकती है। इसलिए अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करते हुए वे फ्लोटिंग मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। पढ़ें- अजीत बिसारिया की एक रिपोर्ट-
जिले की मऊ सदर सीट पर मुख्य लड़ाई बसपा के प्रत्याशी और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, सपा के अल्ताफ अंसारी और भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (भासपा) गठबंधन के महेंद्र राजभर के बीच है।
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मुख्तार 1996 से यहां से लगातार चार बार विधायक चुने जा चुके हैं। जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. राय बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि भाजपा समर्थित प्रत्याशी का चुनाव चिह्न कमल के बजाय छड़ी होने से मतदाता भ्रमित हो रहे हैं।
सपा-बसपा के बीच बंटे मुस्लिम मतदाता
बसपा सुप्रीमो मायावती
मलिक ताहिरपुरा इलाके के मो. सलीम बताते हैं कि अभी तो यहां मुस्लिम मतदाता सपा और बसपा के बीच बंटे दिख रहे हैं। हालांकि पिछले वर्षों का अपना अनुभव बताते हुए वे जोड़ते हैं, पता नहीं मतदान से एक-दो दिन पहले मुख्तार क्या करते हैं कि मुस्लिम मतदाता एकतरफा उनकी ओर झुक जाते हैं। इस बार क्या होगा, नहीं कहा जा सकता।
हट्टी मदारी के मुकेश हरिजन (जाटव) मुख्य लड़ाई हाथी और साइकिल के बीच बताते हैं। जयसिंहपुर गांव के जगपत यादव गुस्से में कहते हैं, भाजपा के लोग भ्रम फैला रहे हैं कि यादव सपा का साथ छोड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा कहीं नहीं है।
मऊ शहर में कैलाश मंदिर के पास साइकिल की मरम्मत करने वाले महबूब बिना झिझके कहते हैं कि हमारे इलाके में तो साइकिल ही ज्यादा चल रही है। व्यापारी सुनील बरनवाल बसपा और भाजपा के बीच टक्कर मानते हैं।
73 वर्षीय व्यापारी नेता उमाशंकर उमर कहते हैं कि मुसलमान सपा और बसपा के बीच बंटता हुआ दिख रहा है। अगर मतदान के दिन भी यही ट्रेंड रहा तो भाजपा समर्थित प्रत्याशी के हाथ बाजी लग सकती है।
यहां पर तो सपा-बसपा के बीच ही लड़ाई
अखिलेश यादव
घोसी विधानसभा सीट से बसपा से माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी, सपा से सुधाकर सिंह और भाजपा से फागू चौहान मैदान में हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. कल्पनाथ राय के गांव सेमरी जमालपुर में पान की गुमटी पर लोग सियासी चर्चा में व्यस्त हैं।
वे सपा विधायक सुधाकर सिंह से नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि रईसा से मझवारा की 3 किलोमीटर सड़क का टुकड़ा आज तक टूटा का टूटा है। टेलीकॉम कंपनी में नौकरी करने वाले बजरंगी राय और सूरज प्रजापति बताते हैं कि उनके गांव में तो हाथी और कमल के बीच ही टक्कर है।
थोड़ा आगे मिले माऊर बोझ के अनिल मिश्रा एडवोकेट भी यही बात दोहराते हैं। मदरसा जाम उल उलूम के प्रबंधक और कोपागंज निवासी मो. याहिया खान मानते हैं कि घोसी क्षेत्र में मुसलमान सपा के साथ है, पर मुख्तार अंसारी की वजह से मुसलमानों का एक हिस्सा बसपा को भी तरजीह देने की सोच रहा है।
कोपागंज के ही रियाजुल हक और हबीबुर्रहमान भी उनसे इत्तेफाक रखते हैं। इंदारा के बीए के छात्र साजिद, मुख्तार अंसारी की वजह से बसपा को अपनी पहली पसंद बताते हैं, तो यहीं के रामजन्म चौहान मानते हैं कि भाजपा प्रत्याशी मुख्य लड़ाई में हैं। महुआ गांव के रामसुधार पांडे व सुखारी राम भाजपा और बसपा के बीच टक्कर मानते हैं।
तीनों मुख्य दलों के बीच कांटे की टक्कर
मोहम्मदाबाद गोहना (सुरक्षित) सीट पर तीनों मुख्य दलों के बीच कांटे की टक्कर है। यहां सपा ने अपने विधायक बैजनाथ पासवान, बसपा ने पूर्व मंत्री राजेंद्र कुमार और भाजपा ने पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर पर दांव लगाया है।
खैराबाद के अब्दुल कादिर और अबू हाशमी कहते हैं कि मौलानाओं की अपील कुछ हद तक असर दिखा रही है। यही वजह है कि मुस्लिम समाज के लोग सपा और बसपा के बीच बंट रहे हैं।
नजदीक में ही सब्जी बेच रहे युवा दानिश कहते हैं, मुख्तार अंसारी के लोग हर सुख-दुख में हाथ बंटाते हैं। इसलिए हमारी पसंद तो वही हैं। मढ़ैया के छेदालाल गुप्ता, रामाशंकर गुप्ता और अलगू चौहान भाजपा को अच्छा खासा समर्थन मिलने की बात कहते हैं।
खुरहट के सुजीत तिवारी, राम लखन तिवारी, अनुराग श्रीवास्तव और उमेंद्र राजभर भाजपा और बसपा को मुख्य लड़ाई में मानते हैं।
मधुबन विधानसभा क्षेत्र के गांव चचाईपार के मतदाता अपनी पसंद और नापसंद खुलेआम जाहिर करने के लिए जाने जाते हैं। मौजूदा विधायक व बसपा प्रत्याशी उमेश पांडे लगातार दो बार से चुनाव जीत रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी अमरेश चंद्र पांडे यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा ने बसपा के पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान को मैदान में उतारा है। चचाई पार के राधेश्याम यादव कांग्रेस-सपा गठबंधन को आगे बताते हैं तो डॉ. सुरेश प्रसाद खुलकर बसपा का पक्ष लेते हैं।
परदहा के बाल किशन कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर मानते हैं। कुछ आगे बढ़ने पर मिले बदनपुर के रामध्यान हरिजन कहते हैं, हाथी भी कहीं से कमजोर नहीं पड़ रहा है।
वहीं खड़े सिंहासन गांव के अय्यूब खान कहते हैं कि मुख्तार अंसारी के बसपा में आने के बाद मुसलमानों का एक हिस्सा बसपा के साथ जुड़ा है, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता। अलबत्ता सामान्य वर्ग और गैर यादव पिछड़ा वर्ग के एक हिस्से का झुकाव भाजपा की ओर देखा जा सकता है।