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लोहिया संस्थान में दवाओँ का संकट

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मुश्किल में मरीज, विलय के सप्ताहभर बाद ही लोहिया संस्थान में दवाओं का संकट
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लोहिया संस्थान में विलय के सप्ताहभर बाद ही दवाओं का संकट शुरू हो गया है। यहां हृदय रोग से लेकर शुगर तक की दवाएं खत्म हो गई हैं।
ऐसे में ओपीडी में आने वाले मरीजों के साथ ही वार्ड में भर्ती होने वालों को भी निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ रहा है।
विलय के समय तीन माह की दवाओं के स्टॉक का दावा किया गया था, लेकिन सप्ताह भर बाद ही किल्लत शुरू हो गई।
लोहिया संस्थान में लोहिया अस्पताल का विलय हो गया है। हॉस्पिटल ब्लॉक (लोहिया अस्पताल) में मरीजों को एक रुपये के पर्चे पर देखा जाता है।
यहां निशुल्क दवाएं देने का भी प्रावधान है। इस ब्लॉक की ओपीडी में रोजाना करीब साढ़े तीन हजार मरीज आते हैं।
विलय के सप्ताहभर बाद ही यहां दवाओं का संकट शुरू हो गया है। अब मरीजों को चंद दवाएं दी जा रही हैं।
हालत यह है कि दिल के मरीज, शुगर, त्वचा, सूजन और थायरॉयड की दवाएं नहीं मिल रही हैं। इसी तरह प्रसूताओं और बच्चों को दिया जाने वाला इंजेक्शन का स्टॉक भी खत्म हो गया है।
तीन दिन में आ जाएगा नया स्टॉक
एमएस, लोहिया संस्थान, डॉ. भुवनचंद तिवारी ने बताया कि विलय के समय बताया गया था कि तीन माह तक के दवाओं और इंजेक्शन का स्टॉक है। अब चंद दवाएं ही बची हैं। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है। वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को जरूरी दवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। दो तीन दिन में नया स्टॉक आने की उम्मीद है। इससे व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
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जितनी दवाएं थीं सब संस्थान को सौंप दीं
पूर्व निदेशक, लोहिया अस्पताल, डॉ. डीएस नेगी बताया कि विलय के समय दवाओं के स्टॉक के मिलान संबंधी कोई बात नहीं हुई थी। जो जैसा था, वैसा ही संस्थान को सौंप दिया गया है। स्टॉक में जितनी दवाएं और इंजेक्शन थे, सब संस्थान को सौंप दिए गए हैं। अब अस्पताल चलाना संस्थान की जिम्मेदारी है। इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता।
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