सतीश कार चालक हैं। उन्होंने बताया कि नवंबर 2024 में उनकी बेटी दृष्टि की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जनवरी 2026 में उन्हें एक बेटा श्री पैदा हुआ था। बीमारी के कारण एक माह बाद ही श्री की भी मौत हो गई। दो वर्ष में दो बच्चों को खोने के गम में प्रीति परेशान रहने लगीं। वह अक्सर उदास रहती थीं। पत्नी को परेशान देख सतीश ने बेटे ओम के साथ प्रीति को कुछ दिन के लिए मलिहाबाद के नई बस्ती स्थित मायके छोड़ दिया। एक सप्ताह वहां रहने के बाद ओम घर आ गया था, जबकि प्रीति मायके में थीं। 17 मार्च को प्रीति के पिता जोधा प्रसाद बेटी को ससुराल छोड़ने के लिए निकले थे। रास्ते में उन्होंने सतीश को फोन किया और कहा कि वह प्रीति को हसनगंज मोहान रोड से ले जाए। जोधा प्रसाद बेटी को वहीं पर छोड़कर चले गए।
घर नहीं पहुंचीं तो दर्ज कराई गुमशुदगी
सतीश के मुताबिक प्रीति के घर नहीं पहुंचने पर उन्होंने खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। 19 मार्च को हसनगंज थाने में प्रीति की गुमशुदगी दर्ज कराई गई। पुलिस को उन्नाव स्थित मगरवारा रेलवे स्टेशन पर ट्रैक किनारे प्रीति घायल अवस्था में मिलीं। उन्हें कानपुर के हैलेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन बाद होश आने पर प्रीति ने सतीश को फोन कर घटना की जानकारी दी। सतीश कानपुर पहुंचे और पत्नी को घर लेकर आए।
दो दिन कहां थी, नहीं दी जानकारी
सतीश ने बताया कि उन्होंने प्रीति से कई बार पूछा कि 17 और 18 मार्च को वह कहां थी। इस पर प्रीति खामोश रही। प्रीति किसी बात का जवाब नहीं देती थी। रविवार रात में खाना खाने के बाद सभी लोग सो गए। सोमवार सुबह उन्होंने पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वह बगल वाले कमरे में गए, जहां प्रीति फंदे पर लटकी मिलीं। इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। एसीपी कृष्णानगर रजनीश कुमार वर्मा का कहना है कि इस मामले में किसी ने कोई आरोप नहीं लगाया है। मामले की छानबीन की जा रही है।