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70 प्रतिशत से अधिक तालाब-झील खत्म,...इसलिए दम तोड़ रही गोमती

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सूख रही गोमती में गिराए जा रहे नाले। - फोटो : ??? ?????
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अतुल भारद्वाज
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शहर की जीवनदायिनी गोमती नदी को पानी उपलब्ध कराने में तालाबों, झीलों का बड़ा महत्व है। हालांकि, इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक का अस्तित्व खत्म हो चुका है।
बची झीलें, तालाब भी खत्म होने के कगार पर हैं। यही कारण है कि गोमती दम तोड़ती नजर आ रही है। इसकी वजह यह है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद भी झीलों के पुनरुद्धार का काम शुरू नहीं किया गया।
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लगातार बढ़ते जा रहे जल संकट का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हर साल भूगर्भ जल स्तर एक मीटर नीचे जा रहा है।
बीबीएयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. और पर्यावरणविद डॉ. वेंकटेश दत्ता का कहना है कि लखनऊ बागों के अलावा झीलों, तालाबों का भी शहर कहा जाता था।
सैकड़ों छोटी-बड़ी झीलों का रिकॉर्ड जिला प्रशासन के राजस्व विभाग के पास है। इनमें से अधिकतर का जुड़ाव गोमती के साथ था, जिससे नदी को पानी मिलता था।
दत्ता ने कहा कि गोमती भूगर्भ जल से पोषित नदी है। इसके लिए झीलों, तालाबों का बड़ा महत्व है। हालांकि, शहरीकरण में सबसे अधिक संकट इन पर ही आया।
ऐसे में बीकेटी की सोनताल झील और चिनहट की चांद झील अब छोटे से तालाब में सिमट गई हैं। सोनताल 154 हेक्टेयर में थी, जिसका 90 प्रतिशत तक हिस्सा विलुप्त हो गया है। वहीं, 35 हेक्टेयर की चांद झील में से पांच हेक्टेयर ही बचा है।
पानी नहीं, सीवर जमा हो रहा
प्रो. दत्ता का कहना है कि तालाब और झीलों में बारिश का पानी जमा होता था। इससे भूगर्भ जल रीचार्ज होता। यह गोमती को बारिश के अलावा बाकी दिनों में पानी उपलब्ध कराता था। अब तालाबों और झीलों में सीवर और गंदा पानी पहुंच रहा है।
जमुना झील का विकास ही ठप
पार्षद मौनू कनौजिया का कहना है कि 2006 में ऐशबाग की जमुना झील के सुंदरीकरण का प्रस्ताव बना। करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर घाट बनवाने के साथ पानी साफ करने के लिए मशीन मंगवाई गई। हालांकि, काम पूरा होने से पहले ही रुक गया और फिर बजट की कमी से बंद हो गया। इसके कुछ भाग को पाटकर बिल्डरों ने प्लॉटिंग कर दी। झील की जमीन पर मकान भी बन गए। कुछ दिन पहले भी एक बिल्डर ने यहां झील पाटने का काम किया। इसकी शिकायत पर एलडीए और जिला प्रशासन ने काम रुकवाया। अब भी यहां चोरी-छिपे मिट्टी डाली जा रही है।
संरक्षण करना ही होगा
प्रो. दत्ता ने बताया कि एनजीटी ने 25 फ रवरी को आदेश कर झीलों के संरक्षण के लिए कहा है। 31 मार्च 2021 तक झीलों, तालाबों की मैपिंग कर रिपोर्ट भी देनी है। तालाबों और झीलों का संरक्षण नहीं हुआ तो खतरनाक परिणाम सामने आएंगे।
काला पहाड़ झील की आधी जमीन ही बची
करीब 16 बीघे की काला पहाड़ झील मोहान रोड पर है। हालांकि, जिला प्रशासन, नगर निगम और एलडीए की पैमाइश में यह मौके पर 10 बीघा ही बची है। इसमें भी काफी जगह पर अतिक्रमण है। छह बीघा जमीन पर पक्के निर्माण हो चुके हैं। इसी तरह रायबरेली रोड पर एक किमी में एल्डिको झील बनवाई गई थी। तीन साल पहले सौंदर्यीकरण शुरू करवाया गया। खोदाई के साथ बैरिकेडिंग करवाई गई। अब यहां भी काम बंद है। तेलीबाग की विनायक झील तो सिर्फ नाम के लिए रह गई है। गंदगी और मलबे से भरी झील को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कई बार नगर निगम और एलडीए को नोटिस जारी कर चुका है। फिर भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। डालीबाग की बटलर पैलेस झील की स्थिति बदतर होती जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने झील में कचरा, सीवर बहाने पर एलडीए को नोटिस जारी किया था।
हैवतमऊ झील भी हो रही खत्म
हैवतमऊ मवैया झील को भी गंदगी, अतिक्रमण खत्म कर रहा है। यहां पक्के मकान बन गए हैं। नगर निगम के अफसरों का कहना है कि झील को अमृत योजना के तहत बचाने की कवायद शुरू हुई है। नगर निगम ने 40 हजार वर्गफीट की झील के सुंदरीकरण और पास के करीब 35 हजार वर्गफीट जमीन पर पार्क विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 20 करोड़ रुपये मांगे हैं। झील की जमीन पर कब्जा कर बनवाए मकान गिराए जाएंगे।
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इन झीलों पर संकट
झील क्षेत्रफल
काकदेहरी, पैकरमऊ 16.45 हेक्टेयर
मलूकपुर ताल 63.95 हेक्टेयर
सोनपुर ताल 153.85 हेक्टेयर
खदरा झील 15.78 हेक्टेयर
चंदा ताल, भैंसोरा 7.60 हेक्टेयर
चांद झील 35.02 हेक्टेयर
डहरवा झील 14.5 हेक्टेयर
सुरहैला झील 13.18 हेक्टेयर
कठौता झील 29.67 हेक्टेयर
पकरिया झील 8.43 हेक्टेयर
चित्री ताल 16.72 हेक्टेयर
खुटारी ताल 9.94 हेक्टेयर
मोहनिया ताल 2.59 हेक्टेयर
मौदेसर झील 26.25 हेक्टेयर
झील, तालाबों का लखनऊ
- 13037 तालाब, झील राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद
- 670 तालाब, झील का आकार एक हेक्टेयर से अधिक
- 70 प्रतिशत झील, तालाब विलुप्त हो चुके
शुरू हुआ तीन झीलों पर प्रयास
वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश पर अब एलडीए ने तीन झीलों के सौंदर्यीकरण का काम शुरू कराया है। मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने बताया कि रायबरेली रोड की एल्डिको झील, मोहान रोड की काला पहाड़ झील और ऐशबाग की जमुना झील का सौंदर्यीकरण फायटो-रेमेडिएशन तकनीक से होगा। प्राकृतिक तरीके से झीलों का संरक्षण होगा।
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