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Lucknow News: बचत खाता खुलवाने में प्रदेश में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं अव्वल, लखनऊ में रहीं पीछे

Sun, 13 Jul 2025 03:51 PM IST
भूपेन्द्र सिंह आशीष गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

बचत खाता खुलवाने में प्रदेश में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं अव्वल हैं। लेकिन, लखनऊ में पीछे हैं। प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर पुरुषों के खातों की संख्या 54,778, जबकि महिलाओं की संख्या 64,481 है। लखनऊ में प्रति लाख आबादी पर पुरुष खातों की संख्या 48,308 और महिलाओं की 48,049 है। 
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Bank (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik
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विस्तार
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बैंकों में खाता खुलवाने के मामले में प्रदेश की महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले बाजी मारी है। जबकि, राजधानी लखनऊ जैसे पढ़े लिखे जिले में महिलाएं अभी भी पुरुषों के मुकाबले पीछे हैं। प्रति लाख आबादी पर प्रदेश की बैंकों में महिला बचत खातों की संख्या पुरुषों के मुकाबले 10,638 ज्यादा रही है। वहीं, लखनऊ में यह स्थिति उलट है। यहां प्रति लाख आबादी पर महिला बचत खातों की संख्या पुरुषों के मुकाबले 259 कम है।

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राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में मार्च 2025 तक कुल 14.14 करोड़ बचत खाते खोले गए, जिसमें 6.84 करोड़ पुरुषों के और 7.29 करोड़ महिलाओं के बचत खाते हैं। प्रति लाख आबादी के औसत के हिसाब से प्रदेश में महिला खातों का औसत 73,524 तो वहीं पुरुष खातों का औसत 62,886 है। यानि, प्रदेश में महिला बचत खातों की संख्या पुरुषों के मुकाबले 10,638 ज्यादा है। 

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वहीं, लखनऊ में प्रति लाख आबादी पर महिला खातों का औसत 259 कम है। लखनऊ में प्रति लाख आबादी पर पुरुष खातों का औसत 48,308 तो महिला खातों का औसत 48,049 है। रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ में मार्च 2025 तक कुल 22.11 लाख बचत खाते खोले गए जिसमें 11.56 लाख पुरुष तो 10.54 लाख महिलाओं के बचत खाते खोले गए।

प्रति लाख आबादी के औसत में लखनऊ एटा जैसे शहर से भी पीछे

प्रति लाख आबादी के हिसाब से महिलाओं व पुरुषों को मिलाकर एटा में सबसे ज्यादा 1.03 लाख खाते, कानपुर देहात में 1.02 खाते और हापुड़ में 1.01 लाख का औसत है। जो कि लखनऊ से करीब करीब दोगुना ज्यादा है। लखनऊ में प्रति लाख आबादी का औसत महज 48,184 बचत खातों का ही है।

तीन वर्षों में लखनऊ के बैंकों में बचत खातों की स्थिति

साल कुल खाते पुरुष महिला
2023 19,96,239 10,20,203 9,76,036
2024 21,59,852 11,17,836 10,42,016
2025 22,11,652 11,56,625 10,54,937
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एलडीएम मनीष पाठक बताते हैं कि हर साल लगातार बचत खातों की संख्या में वृद्धि हो रही है। दो वर्षों में पुरुषों के खातों की संख्या 1.36 लाख ज्यादा तो महिलाओं के बचत खातों की संख्या 79 हजार बढ़ी है। साल दर साल यह आंकड़ा बढ़ रहा है। प्रति लाख आबादी में इसमें थोड़ा सा ही अंतर है, इसके लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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