एडीआर और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 53.2 फीसदी विधायक आपराधिक छवि के हैं।
इसके विपरीत सपा के 49.6 व बसपा के 36.3 विधायक ही दागी हैं। भाजपा के 25 दागी विधायकों में 14 पर गंभीर आपराधिक केस चल रहे हैं।
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दरअसल यूपी में राजनीति, अपराधियों और धनबल का गठजोड़ बन गया है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की तल्ख टिप्पणियों और फैसलों के बावजूद यह गठजोड़ टूट नहीं पा रहा है।
प्रदेश के 403 विधायकों में 189 ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ते हुए अपने ऊपर चल रहे आपराधिक मामलों का ब्यौरा दिया।
इनमें भाजपा के 47 में 25, सपा के 224 में 111 और बसपा के 80 में 29, कांग्रेस के 28 में 13 और रालोद के नौ में दो विधायक हैं। इनमें 24 फीसदी यानी 98 विधायक ऐसे हैं जिनके ऊपर गंभीर आपराधिक मामले हैं।
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ऐसे मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, जबरन वसूली, चोरी, डकैती आदि शामिल हैं। वर्ष 2007 में आपराधिक छवि के विधायकों की संख्या 78 (19.35 प्रतिशत) थी।
गंभीर आपराधिक छवि वाले विधायकों में भाजपा के उपेंद्र और केशव प्रसाद के साथ 14 एमएलए हैं। उपेंद्र व केशव के खिलाफ क्रमश: 11 और नौ मामले हैं। रिपोर्ट के अनुसार उपेंद्र के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का एक मामला तो 16 साल से लंबित है।
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हालांकि, दागी छवि वाले टॉप-10 विधायकों में सपा अव्वल है। जिन दस विधायकों के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक केस हैं उनमें सपा के सात, भाजपा, कौमी एकता दल और निर्दलीय एक-एक हैं।
भाजपा के कई दागी ऐसे हैं जो विधानसभा चुनाव तो लड़े लेकिन जीत नहीं पाए। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने आपराधिक छवि से परहेज नहीं बरता। उसके एक दर्जन से ज्यादा प्रत्याशियों के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज थे।