विसरा के नमूनों को जांच का इंतजार
- फोटो : अमर उजाला
फोरेसिक विशेषज्ञ व स्टेट मेडिकोलीगल सेल के संयुक्त निदेशक डॉ. गयासुद्दीन खान बताते हैं कि विसरा के नमूनों को सुरक्षित रखने की अधिकतम अवधि छह महीने ही है। इसके बाद भी अगर कोई नमूना रखा जाता है तो वह खराब हो जाता है। ऐसे नमूनों के विश्लेषण में निर्धारित परिणाम नहीं मिल पाते।
हवादार और रोशनीयुक्त कमरे में रखने चाहिए नमूने
फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक विसरा के नमूने सुरक्षित रखने के लिए स्थान हवादार और रोशनीयुक्त होना चाहिए। नमीयुक्त जगह पर नमूने खराब होने की आशंका रहती है। हालांकि, अधिकतर वहीं विसरा के नमूने रखे जा रहे हैं जहां नमी और अंधेरा रहता है।
विसरा के नमूनों को जांच का इंतजार
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फोरेंसिक लैब में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से विसरा के नमूने आने की वजह से काम का भार अधिक है। यही वजह है कि विसरा की जांचें लंबित हैं। लैब के सूत्रों का कहना है कि हाई प्रोफाइल मामलों में अधिकारियों के हस्तक्षेप की वजह से जांच हो जाती है, लेकिन आम दिनों में आने वाले नमूने कई-कई महीने तक पड़े रहते हैं।
तीन जार में रखे जाते हैं नमूने
फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गयासुद्दीन खान बताते हैं कि जांच के लिए तीन जार में विसरा के नमूने रखे जाते हैं। एक जार में करीब आधा किलो वजन का पेट के भीतर का हिस्सा होता है। दूसरे में लीवर, प्लीहा (स्प्लीन), छोटी आंत का 20 इंच का टुकड़ा, दोनों तरफ की आधी-आधी किडनी होती है जबकि तीसरे जार में खून के सैंपल होते हैं।