राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की कमी से पढ़ाई पटरी से उतर गई है।
अधिक भार होने से शिक्षक पढ़ाई कराना बोझ समझ कर महज रस्म अदायगी कर रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का ब्यौरा पिछले दिनों जिलेवार एकत्र कराने के साथ शासन को भेजा है।
इसके मुताबिक फिलहाल शिक्षक और प्रधानाचार्य के 10,279 पद रिक्त हैं।
इतना ही नहीं राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 2010 से लेकर 2012 तक खुले 1021 राजकीय हाईस्कूलों में तो सभी पद रिक्त हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय चाहता है कि रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाए, ताकि पढ़ाई का स्तर सुधारा जा सके।
राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य और प्रवक्ता की नियुक्तियां लोकसेवा आयोग करता है।
जबकि लाइसेंसिंग ऑफ टीचिंग सार्टिफिकेट (एलटी) ग्रेड के शिक्षकों की भर्ती का अधिकार मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के पास होता है।
प्रदेश में राजकीय इंटर कॉलेजों में एलटी ग्रेड के 1425 शिक्षकों की भर्ती वर्ष 2012 में शुरू हुई थी, लेकिन आज तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
इसके चलते राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की कमी बनी हुई है।