योजना परवान चढ़ी तो सूबे में ज्यादा लोगों को गरीब परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। केंद्र ने प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सर्वेक्षण का दायरा बढ़ाकर इस संभावना को वास्तविकता में बदलने का रास्ता खोल दिया है।
नए निर्देशों के तहत सर्वेक्षण से वर्षों से गरीब परिवारों का कोटा बढ़ाने की प्रदेश की मांग भी पूरी हो जाएगी। लोगों की यह शिकायत भी दूर हो जाएगी कि वास्तव में गरीब होते हुए भी उन्हें सस्ते अनाज की सुविधा नहीं मिल रही है।
दरअसल, प्रदेश सरकार की तरफ से कई वर्षों से गरीब परिवारों की संख्या का कोटा बढ़ाने की मांग को लेकर केंद्र को पत्र लिखे जाते रहे हैं। प्रदेश का तर्क रहा है कि केंद्र सरकार प्रदेश में सिर्फ 1.06 करोड़ परिवारों को ही गरीबी रेखा से नीचे मानकर उनके लिए सस्ता अनाज मुहैया कराती है।
इन्हीं को गरीबी रेखा से नीचे का कार्ड जारी किया जाता है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए चल रही योजनाओं का लाभ उन तमाम गरीब परिवारों को नहीं मिल पाता जिनके पास ये कार्ड नहीं हैं।