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Monsoon Session : अहम साबित हुआ यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र, पहली बार बोले 26 विधायक, 65 साल बाद नई नियमावली

Sat, 12 Aug 2023 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यह सत्र हंगामे से ज्यादा रचनात्मक उपलब्धियों का गवाह बना। विपक्ष ने जहां अपनी पूरी ताकत से सरकार की खामियां गिनाईं, वहीं सत्ता पक्ष ने भी अपने सरोकार गिना उन्हें कड़े जवाब दिए।
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विधानसभा में सीएम योगी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानमंडल का मानसून सत्र कई मायने में उल्लेखनीय रहा। यह सत्र हंगामे से ज्यादा रचनात्मक उपलब्धियों का गवाह बना। विपक्ष ने जहां अपनी पूरी ताकत से सरकार की खामियां गिनाईं, वहीं सत्ता पक्ष ने भी अपने सरोकार गिना उन्हें कड़े जवाब दिए। वर्षों से लंबित उच्च शिक्षा आयोग के गठन का रास्ता साफ हुआ। यह युवाओं और शिक्षा के हित में बड़ा फैसला है। इससे माध्यमिक व उच्च शिक्षा सहित विभिन्न विभागों की भर्तियां शुरू होने का रास्ता साफ हुआ। वहीं 13 विधेयकों के कानून बनने से यूपी के विकास का रफ्तार पकड़ना तय माना जा रहा है। सूखा और बाढ़ पर लंबी चर्चा और सरकार के जवाब से जनता की समस्याएं और उनके लिए किए जा रहे प्रयास खुलकर सामने आए।

पांच दिन चले मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को विपक्ष ने मणिपुर के मुद्दे पर दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा किया, पर दोनों सदनों में पूर्व निर्धारित सभी विधायी कार्य निपटाकर उदाहरण प्रस्तुत किया गया। विधानसभा में लाए गए उत्तर प्रदेश जगतगुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय विधेयक के कुछ प्रावधानों पर जब सपा के एक सदस्य ने अपनी आपत्ति रखी तो उन्हीं के दल के अन्य सदस्यों का उन्हें समर्थन नहीं मिला। पक्ष-विपक्ष दोनों का इस राज्य विवि की स्थापना को सकारात्मक कदम माना गया। इससे मानसून सत्र यह संदेश भी देने में कामयाब रहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में सरकार की खामियां गिनाना विपक्ष का अधिकार है, पर जनहित के कामों में सहयोग देना फर्ज भी है।
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माना जा रहा है कि कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर, राष्ट्रीय विधि विवि प्रयागराज और उत्तर प्रदेश निजी विवि संशोधन कानून भी शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उत्तर प्रदेश नगर योजना और नगर पालिका संशोधन कानून नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश माल और सेवाकर कानून व्यापारियों को सुविधा और व्यापार को सुगम बनाएगा। इससे प्रदेश को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

वार-पलटवार
नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और सत्ता के पाले में आए सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर को लेकर टीका-टिप्पणी की तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें अपने चाचा शिवपाल यादव से सीख लेने की बात कहकर यह नसीहत दी कि सपा के पारिवारिक अंतरविरोध अभी बिसराए नहीं गए हैं। पलट जवाब में सीएम ने नेता प्रतिपक्ष पर बसपा सुप्रीमो मायावती को धोखा देने का आरोप लगा मतदाताओं के एक खास वर्ग को संदेश देने का काम भी किया। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने भी सांड सफारी का सुझाव देकर चर्चा को रोचक बनाया और हादसों में मरे कांवड़िये व ताजिएदारों को मुआवजा की मांग कर अपना एजेंडा सेट करने की कोशिश की।

कानून-व्यवस्था बनाम बाढ़-सूखा
विपक्ष ने जब कानून-व्यवस्था और मणिपुर के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की तो सत्ता पक्ष ने भी गेंद अपने पाले में करने का प्रयास करते हुए बाढ़ और सूखे के मुद्दे पर चर्चा करने का भरपूर मौका दिया। विपक्ष ने बिजली, गन्ना, मक्का व आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं को बखूबी सामने रखा। वहीं, सत्ता पक्ष ने बाढ़ और सूखा प्रभावित लोगों के लिए किए गए कामों का विस्तार से उल्लेख किया। यह भी बताया कि सर्प दंश और सांड से इंसानों के जीवन को नुकसान को आपदा इसी सरकार में माना गया। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं।

पहली बार बोले 26 विधायक, 65 साल बाद नई नियमावली
यूपी में 65 साल बाद विधानसभा की नई नियमावली की उपलब्धि भी इसी मानसून सत्र के नाम रही। इसमें विधायकों को वर्चुअल भाग लेने की अनुमति सहित कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। करीब 26 विधायक ऐसे रहे, जो पहली बार इसी सत्र में सदन में बोले। चार बार की विधायक विजमा यादव तक पहली बार सदन में बोलीं। इसे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा नए लोगों को बोलने के लिए प्रेरित करने का नतीजा ही कहा जाएगा।
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विधान परिषद में भी सकारात्मक मुद्दों पर लंबी चर्चा
विधान परिषद में भी मानसून सत्र में कई सकारात्मक मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। इनमें विकास प्राधिकरणों की महायोजना और एससी-एसटी छात्रों की समस्याएं भी शामिल हैं। विधान परिषद में सकारात्मक चर्चा का ही नतीजा है कि सभापित कुंवर मानवेंद्र सिंह ने न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन अधिकतम छह माह में करने के सरकार को निर्देश दिए। शिक्षकों की भी अनेक समस्याओं को विधान परिषद में आवाज मिली। इसे सदन के सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना ही कहा जाएगा कि शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर जब सपा सदस्यों ने प्रश्न प्रहर में बहिर्गमन किया, पर अगले मुद्दे पर चर्चा के लिए बमुश्किल एक मिनट बाद ही सदन में पुनः आ गए।
 
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