उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में कुत्ते के काटने से होने वाली घटनाओं की निगरानी के लिए समिति का गठन करने के निर्देश दे दिए गए हैं। नगर निगमों में नगर आयुक्त और अन्य शहरों में डीएम इसके अध्यक्ष होंगे।
उत्तर प्रदेश में कुत्ते के काटने की घटनाओं की रोकथाम के लिए अब हर जिले में निगरानी समितियों का गठन होगा। इसे स्थानीय पशु जन्म नियंत्रण निगरानी समिति का नाम दिया गया है।
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यह समिति शहरों में कुत्तों के काटने, बीमार कुत्तों को दया मृत्यु देने, निराश्रित व पालतू के मामले की देखरेख करेगी। नगर निगमों में नगर आयुक्त और अन्य शहरों में डीएम इसके अध्यक्ष होंगे।
इस संबंध में विशेष सचिव नगर विकास राजेंद्र पेंसिया ने शासनादेश जारी कर दिया है। शासनादेश के मुताबिक इसी समिति की देखरेख में बंध्याकरण, टीकाकरण, कुत्तों को पकड़ने, पशु प्रजनन केंद्रों तक पहुंचाने व नसबंदी के बाद पुन: वापस भेजने का भी काम होगा। साथ ही घातक रूप से घायल या असाध्य रूप से बीमार कुत्तों को पीड़ा रहित मृत्यु देने के लिए पशु चिकित्सक को सोडियम पैंटोथॉल का उपयोग करके दया मृत्यु देने का निर्देश भी देगी।