तीसरे सत्र में एडीजी यूपी-100 आदित्य मिश्र ने कहा कि सीसीटीवी सर्विलांस के लिए लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके लिए क्लाउड सर्वर उपयोग कर रहे यूजर इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ सकते हैं। इसके लिए तीन मॉडल बताए गए।
पहला लखनऊ में दृष्टि प्रोजेक्ट जिसमें राजधानी के 70 चौराहों पर 280 कैमरे लगे हैं। यह पूरी तरह से सरकार का प्रोजेक्ट है। दूसरा रायपुर में जन सहयोग, सीएसआर, एमपी, एमएलए फंड और अन्य संसाधनों से इसकी व्यवस्था की गई है। रायपुर के सीईओ ने वहां लागू की गई त्रिस्तरीय व्यवस्था का जिक्र किया।
सत्र का संचालन करते हुए आईजी एटीएस असीम अरुण ने कहा कि इसके लिए अलग अलग चुनौतियां भी सामने आएंगी, जिसके लिए तैयार रहना होगा। अंत में एडीजी पीएसी आरके विश्वकर्मा ने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के साथ प्रजेंटेशन के जरिए पूरे कार्यक्रम में हुई कार्रवाई के साथ-साथ एक स्मार्ट सिटी के लिए सुरक्षा के क्या क्या मानक हों, इसके बारे में जानकारी दी।
डीजी बीपीआर एंड डी एपी महेश्वरी ने कहा कि स्मार्ट सिटी में नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं में सुरक्षा सबसे पहले है। इसके लिए वीडियो सर्विलांस के विकास एवं यूपी-100 की यह कोशिश प्रशंसनीय है। आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल और डाटा एनालिटिक्स इस दिशा में सबसे अधिक मददगार होगी।
डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि किसी भी परिवर्तन में टेक्नालॉजी ही पुलिस की कार्यशैली को अत्यधिक प्रभावित करेगी। सामूहिक पुलिस व्यवस्था में इसका जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस बल एक बेहतरीन आपात प्रणाली है। सोशल मीडिया में हमारी उपस्थिति अन्य विभागों की तुलना में कहीं ज्यादा है और हमें उस पर गर्व है । तकनीक ने हम सबकी लाइफ स्टाइल बदल दी है। इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम में गम्भीर बदलाव आने का कारण टेक्नालॉजी है। प्रदेश पुलिस और आईआईटी कानपुर व इंडियाना ब्लूमिंगटन यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू साइन किए जाएंगे, ताकि यूपी पुलिस प्रोडक्टिव पुलिसिंग में डाटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर सके।