वाहनों के पेट्रोल-डीजल, बिजली और टेलीफोन पर खर्च में जिला प्रशासन की कोई सीमा नहीं है।
किसी वर्ष में डीएम कार्यालय पेट्रोल-डीजल पर 18.27 लाख रुपये खर्च करता है तो दूसरे वर्ष में 67.02 लाख रुपये। ऐसी शाहखर्ची का खुलासा खुद जिलाधिकारी कार्यालय ने किया है।
सूचना के अधिकार के तहत डीएम कार्यालय ने बताया कि वाहनों के रखरखाव व पेट्रोल-डीजल पर वर्ष 2012-13 में 67.02 लाख रुपये खर्च हुए थे।
लेकिन इसी मद में वर्ष 2013-14 के दौरान 18.27 लाख रुपये खर्च हुए। वर्ष 2012-13 में बिजली भुगतान, नए वाहन की खरीद समेत कई मदों में डीएम दफ्तर ने खूब खर्च किया।
यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता एवं इंजीनियर संजय शर्मा ने जनसूचना अधिकार के तहत मांगी थी।
कलक्ट्रेट के प्रभारी अधिकारी (नजारत) की सूचना के मुताबिक 2012-13 में डीएम कार्यालय ने बिजली भुगतान में 75.10 लाख और टेलीफोन पर 4.96 लाख रुपये खर्च किए जबकि अगले वित्त वर्ष में बिजली पर पांच लाख और टेलीफोन पर 1.58 लाख रुपये व्यय हुए।
वर्ष 2012-13 में 34.45 लाख रुपये केवल वाहन खरीद में खर्च हुए। इस वर्ष में कार्यालय व्यय, कम्प्यूटर अनुरक्षण समेत कई मदों में अन्य वर्षों की अपेक्षा काफी ज्यादा धनराशि खर्च की गई।