फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर निगम व ग्राम पंचायतों को सरकार ने दिया झटका!

Thu, 26 Mar 2015 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों पर अमल की शुरुआत से अगले पांच साल तक सूबे के नगर निगम तंगहाल रहेंगे, वहीं नगर पंचायतें मालामाल होंगी। सरकार ने निगमों को चतुर्थ वित्त से मिलने वाले मौजूदा अनुदान में से पांच फीसदी की कटौती का फैसला किया है।
विज्ञापन


इस फैसले को ज्यादातर निगमों में लगातार भाजपा के महापौरों के काबिज होने से जोड़ा जा रहा है। इसी तरह ग्रामीण निकायों में ग्राम पंचायतें केंद्र की मेहरबानी की कीमत चुकाएंगी। राज्य सरकार ने चतुर्थ वित्त आयोग से मिलने वाले उनके हिस्से में से 20 फीसदी की बड़ी कटौती कर दी है। ये सिफारिशें 2015-16 से लागू की जा सकती हैं।

विधानसभा में बुधवार को चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें और उन पर सरकार के निर्णय की रिपोर्ट पेश की गई। सरकार ने आयोग की उस सिफारिश को नहीं माना जिसमें नगरीय व ग्रामीण निकायों का अनुदान राज्य सरकार के राजस्व का 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने को कहा गया था।
विज्ञापन


हालांकि, इस 12.5 प्रतिशत राजस्व में नगर निकायों व ग्रामीण निकायों की हिस्सेदारी पहले की ही तरह 60:40 अनुपात में बनाए रखने को सुझाव को स्वीकार कर लिया गया है।

पहले इस तरह मिलता था अनुदान

गौरतलब है कि आयोग ने नगर निकायों को मिलने वाली रकम में नगर निगमों, पालिका परिषदों और नगर पंचायतों का हिस्सा क्रमश: 42, 38 व 20 प्रतिशत करने को कहा था। पहले से इन निकायों को क्रमश: 40:40:20 अनुपात में मिल रहा था।

सरकार ने बिना कोई वजह बताए नगर निगमों का हिस्सा बढ़ाने के बजाय पहले से मिल रहे 40 प्रतिशत से भी घटाकर 35 कर दिया। पालिका परिषदों की हिस्सेदारी पहले की ही तरह 40 प्रतिशत रखी जबकि नगर निगमों से कटौती किया गया हिस्सा नगर पंचायतों के खाते में डाल दिया। अब नगर पंचायतें 20 की जगह 25 फीसदी हिस्सा पाएंगी।

ग्राम पंचायतों पर केंद्र मेहरबान तो राज्य की बेरुखी
चतुर्थ वित्त आयोग ने ग्रामीण निकायों को मिलने वाले 40 प्रतिशत में जिला पंचायतों को 15, क्षेत्र पंचायतों को 10 व ग्राम पंचायतों को 75 फीसदी देने को कहा था। सरकार ने इसे जिला पंचायतों को 40, क्षेत्र पंचायतों को 10 और ग्राम पंचायतों को सिर्फ 50 प्रतिशत पर सीमित कर दिया।

सरकार ने इसके पीछे तर्क दिया कि केंद्र ने चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर 2015-20 के लिए सिर्फ ग्राम पंचायतों के लिए 35776.56 करोड़ रुपये की सिफारिश की है, जबकि तेरहवें वित्त आयोग में यह रकम महज 9787 करोड़ थी।

केंद्र ने जिला पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों की आवश्यकता के लिए राज्य सरकार को ध्यान देने को कहा है। ऐसे में इनके बजट का बंदोबस्त करने के लिए इस अनुपात को बदलना पड़ा।

आजम की सिफारिशें नगर निगमों पर पड़ीं भारी

चतुर्थ वित्त आयोग का गठन पूर्व मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में किया गया था। उन्होंने दिसंबर 2014 में अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी, जिसे उन्होंने सरकार को भेज दिया था।

प्रदेश कैबिनेट में चर्चा के बाद इन पर सिफारिशें देने के लिए नगर विकास मंत्री आजम खां की अध्यक्षता में एक मंत्रिसमूह बनाया गया। इसकी रिपोर्ट में ही नगर निगमों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की सिफारिश की गई थी। साथ ही महापौरों को अविश्वास प्रस्ताव से हटाए जाने की व्यवस्था खत्म करने जैसी सिफारिशों को नामंजूर कर दिया गया था।

तीसरे वित्त आयोग के बाद
- राज्य सरकार के राजस्व का 12.5 प्रतिशत नगर निकायों व ग्रामीण निकायों को।
- 12.5 प्रतिशत राजस्व का 60 फीसदी हिस्सा नगरीय स्थानीय निकायों को, 40 फीसदी ग्रामीण निकायों को।

- नगरीय निकायों को मिलने वाली रकम का 40 प्रतिशत नगर निगमों, 40 प्रतिशत नगर पालिका परिषदों और 20 प्रतिशत नगर पंचायतों को।
- ग्रामीण निकायों को मिलने वाली रकम का 20 प्रतिशत जिला पंचायत, 10 प्रतिशत क्षेत्र पंचायत और 70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को।
विज्ञापन

चतुर्थ वित्त आयोग के बाद अब ये होगा

- पहले की तरह राज्य सरकार के राजस्व का 12.5 प्रतिशत नगर निकायों व ग्रामीण निकायों को।

- 12.5 प्रतिशत राजस्व का 60 फीसदी हिस्सा नगरीय स्थानीय निकायों को, 40 फीसदी ग्रामीण निकायों को।

- नगरीय निकायों को मिलने वाली रकम का 35 प्रतिशत नगर निगमों, 40 प्रतिशत नगर पालिका परिषदों और 25 प्रतिशत नगर पंचायतों को।

- ग्रामीण निकायों को मिलने वाली रकम का 40 प्रतिशत जिला पंचायत, 10 प्रतिशत क्षेत्र पंचायत जबकि 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को।

कब से लागू हो, सरकार तय करेगी
सरकार ने अभी तय नहीं किया है कि चौथे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें कब से लागू हों। हालांकि माना जा रहा है कि नए वित्तीय वर्ष के ठीक पहले सरकार ने इन पर निर्णय कर लिया है, लिहाजा इन्हें 2015-16 से लागू किया जा सकता है।

इसका एक संकेत यह है कि सरकार ने 14 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर ग्राम पंचायतों को बढ़कर मिलने वाले बजट की प्रत्याशा में इनको राज्य वित्त से मिलने वाले हिस्से में 20 फीसदी की कटौती कर दी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें