नाबालिग खिलाड़ियों के यौन शोषण में फंसे यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के बर्खास्त सचिव डॉ. विजय सिन्हा और उसके बेटे बर्खास्त कार्यकारी सचिव निशांत सिन्हा ने अकादमी को 26 महीने से शोषण, भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं का अड्डा बना रखा था।
बाप-बेटे इस जोड़ी ने उगाही और शोषण का कोई भी तरीका बाकी नहीं रखा। रिटायर्ड जिला जज की रिपोर्ट में बाप-बेटे की जैसी करतूतें सामने आईं है, उसने अकादमी और खेल से जुडे़ लोगों के होश उड़ा दिए हैं।
अकादमी में गड़बड़ियों की जानकारी मिलने पर यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के चेयरमैन अखिलेश दास ने पिछले साल चार अक्तूबर को एक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने विजय और उसके बेटे के खिलाफ शिकायतों को सही पाते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी।
तब चेयरमैन ने मामले की जांच रिटायर्ड जिला जज यूपीएस कुशवाहा और सदस्य एडवोकेट आलोक कुमार सिंह को सौंपी। आयोग ने इसी साल 23 जनवरी को रिपोर्ट सौंपी और विजय को एसोसिएशन की प्राथमिक सदस्यता से हटाने और निशांत व उसके पीए करन श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की। इसी आधार पर बुधवार को गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।
आयोग की रिपोर्ट के हर पन्ने पर बाप-बेटे का कच्चा-चिट्ठा
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जांच रिपोर्ट में कहा गया है निशांत ने अपने पिता डॉ. विजय सिन्हा के पद और प्रभाव का बेजा फायदा उठाया।
दोनों बैडमिंटन एसोसिएशन का ऑफिस और बाबू बनारसी दास बैडमिंटन अकादमी का इस्तेमाल निजी प्रॉपर्टी के रूप में कर रहे थे। दोनों की करतूतें ऐसी हैं जैसे आसाराम और उसके बेटे नारायन स्वामी की। गौरतलब है कि आसाराम और नारायन भी यौन शोषण में फंसे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया था कि डॉ. विजय का किसी भी रूप में एसोसिएशन में रहना बैडमिंटन व खिलाड़ियों के लिए उचित नहीं है। यही नहीं, विजय ने बेटे निशांत की नियुक्ति भी अवैध तरीके से कराई थी। निशांत वर्ष 2011 से अकादमी में सक्रिय था और बैडमिंटन खेलते-खेलते वह कार्यकारी सचिव बन गया।
निशांत ने अय्याशी में उड़ा डाले 13 लाख रुपये
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निशांत ने 26 महीने में कई खिलाड़ियों से संबंध बनाया
अवैध तरीके से 15 जून 2014 को कार्यकारी सचिव बनाए गए निशांत ने 26 महीने के कार्यकाल के दौरान कई नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ियों पर दबाव बनाकर उनका शारीरिक शोषण किया। फिर वह उन खिलाड़ियों पर अपनी सहेलियों को लाने का दबाव बनाने लगा।
जांच में सामने आया कि निशांत सिन्हा ने अकादमी के 13 लाख रुपये अपनी अय्याशी में उड़ा डाले। रिपोर्ट के अनुसार 28 जनवरी 2014 से दो अप्रैल 2016 के बीच निशांत ने अकादमी से कई बार में कुल 1294451 रुपये लिए। कैशियर रुपये देने के लिए उसके पिता विजय से पूछते तो वह सहमति जता देते। ये रुपये किसलिए लिए जा रहे थे? कहां खर्च किए गए? इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।