मोहनलालगंज सीट पर जश्न मनाते सपा कार्यकर्ता।
- फोटो : amar ujala
मोहनलालगंज के मतदाताओं ने इस बार भारी उलटफेर कर दिया। केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर हैट्रिक लगाने की आस में चुनावी मैदान में थे, लेकिन वोटरों ने उनका यह अरमान पूरा नहीं होने दिया। उन्हें 70 हजार 292 मतों से हार मिली।
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आर के चौधरी ने उन्हें हरा दिया। सपा प्रत्याशी को 6 लाख 67 हजार 869 मत मिले। वहीं, भाजपा सांसद कौशल किशोर को 5 लाख 97 हजार 577 मत प्राप्त हुए।
मतदाताओं की नाराजगी नहीं भांप पाए कौशल
मोहनलालगंज क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी कौशल किशोर मतदाताओं का रुख भांपने में पूरी तरह से फेल रहे। सवर्ण मतदाताओं के साथ ही उनकी बिरादरी का एक बड़ा वर्ग इस बार उनके साथ नहीं खड़ा हुआ। क्षेत्रीय मुद्दों की अनदेखी और दो बार सांसद रहना भी उनके खिलाफ गया। इनके बीच विभिन्न वजह से विवादों से चर्चा में रहे उनके परिवार ने भी इस हार में बड़ी भूमिका निभाई।
बेहद सामान्य परिवार से निकलकर सांसद और राज्यमंत्री तक के ओहदे तक पहुंचने वाले कौशल किशोर की छवि एक जमीनी नेता की है। इसी के दम पर मलिहाबाद विधानसभा सीट से वे एक बार निर्दलीय विधायक भी रहे। पिछले दो बार से वे मोहनलालगंज क्षेत्र से सांसद हैं। इस दौरान उनकी क्षेत्रीय पैठ थोड़ी कम हुई। कार्यकाल के दौरान उन पर सवर्णों के विरोध में काम करने के आरोप भी लगे। क्षेत्र में सवर्ण बिरादरी पर लगे एससी-एसटी एक्ट में दर्ज हुए मुकदमों का ठीकरा भी उनके सिर फोड़ा गया। सिधौली और मोहनलालगंज क्षेत्र के मतदाताओं का उन पर क्षेत्रीय मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप है।
इसके चलते क्षेत्र में न तो डिग्री कॉलेज बन सके और ना ही रोजगार के मौके पैदा हुए। मलिहाबाद क्षेत्र में मंडी का निर्माण तो हुआ पर चालू नहीं हुई। वहीं सिधौली में मंडी निर्माण सिर्फ वायदों और दावों तक ही सीमित रहा। राजधानी से सटा क्षेत्र होने की वजह से ट्रैफिक दबाव इन क्षेत्र पर काफी है। इसके चलते कई क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर बनाने की मांग काफी लंबे समय से उठ रही है। 10 साल के कार्यकाल में क्षेत्र में एक भी फ्लाईओवर का निर्माण न हो पाना भी उनके खिलाफ गया।