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गैंगरेप: आखिर किसे बचा रही यूपी पुलिस?

Mon, 21 Jul 2014 11:16 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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मोहनलालगंज कांड को लेकर पुलिस के खुलासे पर कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने जो थ्योरी गढ़ी वह किसी के भी गले नहीं उतर रही।
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जो अफसर मौका-ए-वारदात का मुआयना, पीड़ित को आई चोटों की मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक विशेषज्ञों से सलाह करने के बाद कल तक यह दावा कर रहे थे कि दो से ज्यादा लोगों ने दरिंदगी की वही अफसर रविवार को यह साबित करने की कोशिश करते रहे कि आरोपी सिर्फ एक है।

और भी कई ऐसे तथ्य हैं जो इशारा करते हैं कि पुलिस कुछ तो छिपा रही है। कोई ऐसी बात है, जिसे जाहिर किए बगैर ही इस जघन्य वारदात का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।
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ये है पुलिस की थ्योरी

पुलिस की थ्योरी है कि आरोपी झांसा देकर युवती को अपने साथ ले गया था तो दूसरी ओर पड़ताल में पुलिस को यह भी पता चला कि महिला रात में साढ़े नौ बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलती थी।

वारदात के दिन की मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड से सामने आया है कि उसने रात 10 बजकर 22 मिनट पर आखिरी बार फोन पर उसकी किसी से बात हुई थी और इसके बाद ही वह घर से बाहर निकली थी।

पुलिस तर्क दे रही है कि महिला की पिछले कुछ दिनों से एक अनजान शख्स से बातचीत हो रही थी और उसी के बुलाने पर वह घर से निकल गई।

यह तर्क गले से नहीं उतरता कि जो महिला सेक्योरिटी को इतनी प्राथमिकता देती थी उसका किसी अनजाने शख्स के बुलावे पर देर रात बाहर मिलने निकलना और फिर उसकी मोटरसाइकिल पर बैठ जाना समझ से परे है।

पुलिस का दावा पढ़िए

पुलिस का यह दावा कि सिक्योरिटी गार्ड रामसेवक ने दुराचार की कोशिश की और महिला को इस कदर घायल कर दिया कि उसकी मौत हो गई, भी सवाल खड़े करता है।

जिस तरह से महिला ने संघर्ष किया उससे यह थ्योरी किसी के गले नहीं उतरती। शुरुआत में पुलिस बाराबंकी से लेकर नोएडा तक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में जुटी थी। पांच लोगों को हिरासत में लेने के बाद चार विशेष टीमें बनाकर आरोपियों की गिरफ्तारी की कोशिश करने के दावे किए जा रहे थे।

लेकिन अचानक उसके यू-टर्न लेने से यह सवाल उठ रहा है कि पहले वह गलत दावे कर रही थी या अब।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मोहनलालगंज मामले में पुलिस अफसरों से सीधा जवाब तलब किए जाने और मामले का खुलासा करने के लिए एडीजी सुतापा सान्याल के नेतृत्व में विशेष टीम गठत किए जाने के निर्देश के बाद से ही अफसर दबाव में थे।
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पुलिस ने क्यों दिया ये बयान?

शायद यही वजह रही कि वारदात के अगले दिन ही आला अफसरों ने प्रेस वार्ता कर यह दावा कर दिया कि केस को सुलझा लिया गया है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अफसरों ने उस समय भी कहा था कि दरिंदगी करने वालों को चिह्नित कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। गार्ड रामसेवक तो पहले से ही अपने घर पर मौजूद था और उसके मोबाइल फोन से युवती के मोबाइल पर कॉल किए जाने की पुलिस को पहले ही जानकारी हो गई थी।

फिर अफसर यह बयान क्यों देते रहे कि असली आरोपियों को पहचान लिया गया है और उन्हें जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे कौन हैं जिन्हें चिह्नित करने और पहचानने के बाद पुलिस ने यू-टर्न लिया और उसकी थ्योरी रामसेवक पर आ रुकी।
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