सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत मोदी ने वाराणसी के जिस जयापुर गांव को गोद लिया है, वहां भगवा ब्रिगेड ने कब्जा जमा लिया है। यहां पीएम मोदी का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है।
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संघ के अरविंद सिंह, जय प्रकाश, राजन राय और 25 स्वयंसेवकों की एक टीम ग्राम प्रधान दुर्गावती देवी के साथ सरकारी प्रतिनिधियों से लेकर, बनारस हिंदू विश्वविद्यलाय के शोधकर्ताओं और देश-विदेश के एनजीओ के लोगों से मिल रहे हैं।
संघ ने करीब साढ़े चार हजार आबादी वाले इस गांव में हो रहे विकास कार्य पर नजर रखने के लिए नौ लोगों की एक कोर टीम भी बनाई है। दिलचस्प बात यह है कि यहां एक भी मुस्लिम नहीं है।
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7 नवंबर को जयापुर को गोद लेने के मोदी के ऐलान के बाद से ही संघ के विभाग प्रचारक सुरेंद्र, प्रांत प्रचारक अभय और सेवा प्रमुख गौरी शंकर कई बार गांव में प्रवास कर चुके हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2002 में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस गांव को सर्वांगीण विकास के लिए गोद लिया था।
यहां सन् 1984 से संघ का डेरा
भाजपा के काशी क्षेत्र के संगठन सचिव और संघ से ताल्लुक रखने वाले चंद्रशेखर ने संघ के पदाधिकारियों व स्थानीय रामलीला समिति के साथ मिलकर गांव में जल्द ही एक पब्लिक मीटिंग करने का फैसला लिया है। इस मीटिंग में गांव के वार्षिकोत्सव यानी ग्राम स्थापना दिवस की व्यवस्था और कार्यक्रमों पर बात होगी।
मोदी ने ही गांव के दौरे के दौरान लोगों से कहा था कि वे रेवेन्यू रिकॉर्ड की जांच करें और पता लगाएं कि गांव कब अस्तित्व में आया था। संघ के पदाधिकारियों ने इस आयोजन के लिए दो मौके चुने हैं, प्रबोधिनी एकादशी और देव दीपावली। लेकिन, ग्राम प्रधान का मानना है कि यह उत्सव 7 नवंबर को ही मनाया जाना चाहिए।
ग्राम प्रधान के प्रतिनिध नारायण सिंह पटेल वजह बताते हैं कि 7 नवंबर को ही इस गांव के बारे में दुनिया ने जाना, जब मोदीजी जयापुर आए और मंच से गांव को गोद लेने का एलान किया। पटेल ने यह भी बताया कि वह भी संघ की शाखा के नियमित सदस्य हैं और इस गांव में 1984 से शाखा लग रही है।
मोदी लेकर आए अच्छे दिन
क्योंकि, ये गांव पीएम मोदी के नाम से जाना जाने लगा है इसलिए यहां विकास कार्य भी रफ्तार से हो रहे हैं। एक बैंक की ब्रांच खुल रही है, तो हेल्थ कैंप, इंटरनेट कनेक्टिविटी भी मुहैया कराई जा रही है।
इसके अलावा, गांव के लोगों के लिए मुफ्त बीज व अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं। गांव के लोगों को पहले खरीदारी करने शहर जाना पड़ता था, लेकिन अब वाराणसी के व्यापारियों और दुकानदारों ने गांव में ही स्टॉल लगा लिए हैं।
रामदेव की पतंजलि योग समिति ने भी 25 डॉक्टर्स की एक टीम के साथ गांव में हेल्थ चेकअप कैंप की शुरुआत कर दी है। यह कैंप गांव में 28 से 30 नवंबर तक लगा रहेगा। इसमें पैथोलॉजिस्ट व योग गुरु मौजूद रहेंगे।
इतना ही नहीं, बीएसएनएल के अधिकारियों ने भी हाल ही में गांव का सर्वे किया, ताकि वहां 3जी इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा सके। पंचायत भवन या प्राइमरी स्कूल के कैंपस में बीएसएनएल ने अपना ऑफिस बनाने का मन बनाया है।
गांव के लोगों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब केंद्र सरकार का टेक्सटाइल मंत्रालय खुद यहां के युवाओं को हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम की ट्रेनिंग देने के लिए हॉल मांगेगा।
जानकारी के मुताबिक, 23 नवंबर को गांव पहुंचे मंत्रालय के अधिकारियो ने गांव के युवाओं को वादा भी किया है कि अगर वे ट्रेनिंग में हिस्सा लेते हैं तो उन्हें 2400 रुपये हर महीने दिए जाएंगे।
इसके अलावा, एक जापानी एनजीओ ने भी गांव के लोगों को सफाई और शिक्षा के बारे में जागरूक किया। यूपी एग्रीकल्चरल डायरेक्ट्रेट के अधिकारियों ने भी पिछले महीने गांव का दौरा किया। विभाग यहां कृषि भवन बनाना चाहता है। इतना ही नहीं, चेन्न्ाई से एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने भी हाल ही में गांव का दौरा किया और गांव में एक गौशाला बनाने की इच्छा जाहिर की।