लखनऊ। ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में शुक्रवार को कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बन गया, मानो वास्तव में बड़ा रेल हादसा हो गया हो। ट्रेन के दो डिब्बों के बेपटरी होने, यात्रियों के घायल होने और कई लोगों के कोच में फंसने का दृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, रेलवे, एसडीआरएफ, आरपीएफ, फायर सर्विस, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। सायरन की आवाज, रेस्क्यू उपकरणों की गूंज और तेजी से चल रहे बचाव अभियान के बीच एक-एक कर फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
पूर्वाेत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि मॉकड्रिल सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई, जिसमें लखनऊ जंक्शन-ऐशबाग रेलखंड पर क्रॉसिंग संख्या दो स्पेशल के निकट एक स्पेशल ट्रेन डिरेल हो गई थी। कंट्रोल रूम से तत्काल संबंधित अधिकारियों, एनडीआरएफ, पुलिस और सिविल व मंडल चिकित्सालयों को सूचना दी गई।
11वीं वाहिनी एनडीआरएफ के कमांडेंट अनूप सिंह बिष्ट के निर्देशन में आयोजित इस संयुक्त मॉक ड्रिल में 35 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम ने विशेष हाइड्रोलिक उपकरणों की मदद से दुर्घटनाग्रस्त कोच को काटकर भीतर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, जबकि अन्य एजेंसियों ने पूरे घटनास्थल को सुरक्षित बनाते हुए राहत कार्य को गति दी।
अभ्यास से पहले रेलवे, एनडीआरएफ, फायर, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने संयुक्त बैठक कर पूरे अभियान की रूपरेखा तय की। मॉक ड्रिल में रेलवे की वरिष्ठ मंडल सुरक्षा अधिकारी शिल्पी कनौजिया, डीओएम जेएन गुप्ता, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अरुण त्रिपाठी, सीएमओ रेलवे डॉ. दीक्षा चौधरी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। एनडीआरएफ टीम का नेतृत्व निरीक्षक अजय सिंह ने किया।
ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में हुआ मॉक ड्रिल।
ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में हुआ मॉक ड्रिल।
ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में हुआ मॉक ड्रिल।
ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में हुआ मॉक ड्रिल।
ऐशबाग रेलवे कोच यार्ड में हुआ मॉक ड्रिल।