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IAS अनुराग की मौत: फोरेंसिक टीम पहुंचने से पहले घटनास्थल बिगाड़ चुकी थी पुलिस

Sat, 20 May 2017 02:03 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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इनसेट में अनुराग तिवारी - फोटो : amar ujala
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सड़क पर मिले शवों की तहकीकात को लेकर पुलिस कितनी गंभीर और संवेदनशील है? आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी की मौत इसका ज्वलंत उदाहरण है।
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पुलिस की कामचलाऊ कार्रवाई ने घटनास्थल से ऐसे तमाम साक्ष्य मिटा दिए जो आईएएस अधिकारी की मौत की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस के पास कोई भी ऐसी फोटो अथवा वीडियो नहीं है जिससे आईएएस का शव मूल स्थिति में पड़ा दिख रहा हो।

पुलिस ने गेस्टहाउस के उस कमरे की भी गहराई से पड़ताल नहीं की, जिसमें आईएएस ठहरे हुए थे। यही नहीं, मौत के 48 घंटे बाद तक पुलिस आर्यन रेस्टोरेंट में डिनर की सीसीटीवी फुटेज तक नहीं देख सकी है। आईएएस के भाई आलोक ने पुलिस की इन लापरवाहियों के चलते तमाम साक्ष्य नष्ट होने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है।
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पुलिस के पास आईएएस अनुराग तिवारी का सिर्फ एक फोटो है, जिसमें वह पीठ के बल पड़े हुए हैं जबकि वह सड़क पर औंधे मुंह गिरे थे। उनका शव किस स्थिति में था? चेहरा, हाथ-पैर किस दिशा और दशा में थे? पैरों में चप्पल थी या नहीं? चप्पल थीं तो शव से कितनी दूर पर थीं? यह जानकारियां जांच के लिए अहम साबित होतीं लेकिन पुलिस के पास इससे संबंधित कोई साक्ष्य नहीं है। ऐसे में मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम के पास करने को बहुत ज्यादा नहीं था।

आईएएस के शव को समझा सामान्य नागरिक का शव

गेस्ट हाउस में जांच करती एसआईटी टीम। - फोटो : amar ujala
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आईएएस के शव को सामान्य नागरिक की बॉडी मानते हुए पुलिस ने गंभीरता बरतने की जरूरत नहीं समझी। नरही चौकी के सिपाही हरवीर यादव ने औंधे मुंह पड़े शव को पलट दिया। इसके बाद दरोगा विनय शर्मा ने अपने मोबाइल कैमरे से शव की फोटो खींची।

पुलिस की दूसरी लापरवाही स्टेट गेस्टहाउस के कमरा नंबर-19 की बारीकी से पड़ताल में हुई। चूंकि, इस कमरे में आईएएस अधिकारी के दोस्त एलडीए वीसी पीएन सिंह रह रहे थे, इसलिए पुलिस ने कमरे की छानबीन में औपचारिकता मात्र निभाई।

पुलिस कमरे में पहुंची तो चार्जिंग पर लगे आईएएस के मोबाइल फोन के अलावा पीएन सिंह का एक फोन तथा सिगरेट के 15-20 टोटे मिले।

पुलिस ने कमरे की फोरेंसिक पड़ताल कराने की आवश्यकता नहीं समझी। हो सकता है कि कमरे की जांच में कुछ ऐसे तथ्य लग जाते जिससे आईएएस की मौत का राज सुलझाने में मदद मिलती।

48 घंटे बाद भी नहीं मिल सकी सीसीटीवी फुटेज

पुलिस की संजीदगी का आलम यह है कि आईएएस की मौत के 48 घंटे बाद यानि शुक्रवार सुबह आर्यन रेस्टोरेंट की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई। देर शाम तक फुटेज को बारीकी से नहीं देखा जा सका था। आईएएस के दोनों मोबाइल फोन की कॉल डिटेल का भी अध्ययन भी सुस्त गति से चल रहा है।

अनुराग तिवारी के बैच के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की इन्हीं लापरवाहियों के कारण परिवारीजन निष्पक्ष जांच का भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, आईएएस का गायब आईफोन ढूंढने के लिए पुलिस ने उनके परिवारीजनों से संपर्क किया है। एसएसपी ने बताया कि अनुराग के पास आईफोन था भी या नहीं? यह स्पष्ट नहीं है।

गेस्टहाउस के कमरे से एक ही फोन मिला है। अगर उनके पास दो फोन होंगे तो रेस्टोरेंट की सीसीटीवी फुटेज में नजर आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने गेस्टहाउस के कमरे में रखे अनुराग के तीन बैग परिवारीजनों को दे दिए हैं।

अगर उनके पास आईफोन था तो हो सकता है कि वह बैग में हो। परिवारीजनों से बैग में रखे सामान में फोन ढूंढने के लिए संपर्क किया गया है।

किस युवती से आधी रात तक चैटिंग कर रहे थे आईएएस

आईएएस अनुराग के पर‌िजन
अनुराग तिवारी मंगलवार रात ढाई बजे तक वॉट्सएप पर जिससे चैटिंग कर रहे थे, वह कर्नाटक की एक युवती बताई जा रही है। युवती कौन थी? उसका आईएएस से क्या रिश्ता है? एसआईटी इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

एसआईटी में फेरबदल, एक इंस्पेक्टर हटे, दो नए नाम शामिल
एसआईटी गठित होने के चौबीस घंटे के भीतर ही टीम में फेरबदल कर दिया गया। इंस्पेक्टर हसनगंज उदयवीर सिंह को हटाकर कैसरबाग इंस्पेक्टर डीके उपाध्याय और सर्विलांस प्रभारी अमरेश त्रिपाठी को टीम में शामिल किया गया है।
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आईएएस की चोटें सड़क पर गिरने जैसी नहीं

आईएएस के शरीर पर आई चोटें सड़क पर गिरने जैसी नहीं हैं। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों का यही मानना है। ठुड्डी पर लगे कट के निशान के अलावा अन्य चोटों के बारे में पैनल में शामिल एक चिकित्सक का कहना है कि चेहरे पर चोटों के कुछ हलके निशान हैं जो सड़क पर गिरने के कारण नहीं आए। यह निशान ऐसे हैं जैसे हाथ से दबाने के दौरान आते हैं।

यही वजह है कि चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की बात लिखी है। आईएएस के सड़क पर चलते हुए ठुड्डी के बल गिरने की बात भी चिकित्सकों को हजम नहीं हो रही है। चिकित्सकों का मानना है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति सड़क पर चलते हुए सीधे ठुड्डी के बल नहीं गिर सकता। अगर किन्हीं हालातों में इस तरह से गिर भी गया तो उसकी मौत नहीं हो सकती?

बायें हाथ पर था आईएएस के सिर का आधा हिस्सा
आईएएस का शव औंधे मुंह पड़ा हुआ था और सिर का आधा हिस्सा बायें हाथ पर था। नरही चौकी के पुलिसकर्मियों ने बताया कि आईएएस का बायां हाथ उनके सिर से आगे तक सीधी अवस्था में था। उनका सिर कंधे से कोहनी के बीच में टिका हुआ था। कनपटी कंधे पर थी और नाक व मुंह सड़क से छू रहा था।

अमूमन पेट के बल बिस्तर पर लेटने पर शरीर की यह स्थिति होती है। आईएएस के शव की यह स्थिति गिरने की नहीं मानी जा रही है।
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