सपा कार्यालय में मंगलवार शाम निशक्त पति के लिए नौकरी की गुहार लेकर आई कानपुर की एक महिला को सुरक्षाकर्मियों ने पीट दिया।
मारपीट और धक्का-मुक्की में महिला के कपड़े फटने का आरोप है।
यही नहीं महिला का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उसके एक वर्षीय दुधमुंहे बच्चे को गोद से छीनकर जमीन पर गिरा दिया और सपा सुप्रीमो के हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र फाड़ कर फेंक दिया।
महिला चीखती रही लेकिन किसी ने मदद नहीं की। बाद में एक राहगीर की मदद से वह एसएसपी आवास पहुंची लेकिन यहां तैनात पुलिसकर्मियों ने भी उसे टरका दिया।
पीड़िता ने महिला थाना में लिखित शिकायत की है। एसओ महिला थाना ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
कानपुर के रेल बाजार निवासी ज्योति देवी (35) के पति अरविंद निशक्त हैं। ज्योति मंगलवार को बेटी जिया (8) व एक वर्षीय मासूम बेटे समर के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ आई थी।
ज्योति का कहना है कि निशक्त पति की नौकरी की गुहार लेकर डीएम कानपुर से मिली थी। उन्होंने उसे लखनऊ भेजा था।
मंगलवार शाम पांच बजे उसकी मुलाकात सपा सुप्रीमो से पार्टी कार्यालय में हुई। सपा सुप्रीमो ने उसके प्रार्थना पत्र पर डीएम कानपुर को कार्रवाई के निर्देश देते हुए अपने हस्ताक्षर कर निजी सचिव को थमा दिया।
निजी सचिव ने मोहर लगाकर प्रार्थना पत्र उसे सौंप दिया। उसका कहना है कि, कार्यालय से निकलते ही सपा सुप्रीमो के सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और बिना पूछे भीतर जाने पर लताड़ने लगे।
विरोध पर सुरक्षाकर्मी अभद्रता पर उतर आए। ज्योति का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उसे पीटा। बकौल ज्योति, सुरक्षाकर्मियों ने सपा सुप्रीमो के हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र को भी फाड़ दिया।
वह चीखी तो गोद से बच्चे को छीनकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद उसे धक्के मारकर कार्यालय से निकाल दिया गया।
एक राहगीर ने 50 रुपए देकर महिला को रिक्शा से एसएसपी आवास भेजा। एसएसपी की अनुपस्थिति में वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने ज्योति को महिला थाना जाने की बात कहकर टरका दिया।
महिला एसओ शिवा शुक्ला का कहना है कि टूटी फूटी भाषा में लिखी तहरीर में किसी का नाम नहीं है। उधर, सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कार्यालय में ऐसी किसी तरह की घटना से इंकार किया है।