उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन का एक वर्ष का कार्यकाल लाल बत्ती पाने की जुगत में ही बीत गया। आयोग के पास उपलब्धि के नाम पर महज 39 मामलों में सुनवाई के लिए समन जारी करने और आगरा में धर्मांतरण मामले की जांच के अलावा और कुछ नहीं है।
प्रदेश सरकार ने 9 अप्रैल 2014 को अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया था। इसमें अध्यक्ष के अलावा आठ सदस्य नामित किए गए। पिछले एक वर्ष में आयोग के अध्यक्ष शकील अहमद ने लाल बत्ती पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया।
अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां का खास होने के कारण सरकार ने आयोग के अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का निर्णय किया। इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पारित कर राजभवन भेजा गया, लेकिन राज्यपाल ने इसमें कई आपत्तियां लगा दीं।
इससे खफा आजम ने राज्यपाल के खिलाफ कई बार सार्वजनिक रूप से टिप्पणी भी की। इसके बाद पिछले महीने ही आजम ने आयोग के अध्यक्ष को राज्यमंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव कैबिनेट के साथ ही विधानसभा में भी पारित करा दिया, लेकिन इसे भी राज्यपाल ने विधिक परीक्षण के नाम पर रोक दिया है।