प्रदेश की सपा सरकार ने सूबे में 2017 के चुनाव के लिए अपने एजेंडे को धार देनी शुरू कर दी है। इसके तहत आगामी चुनावी बजट में अल्पसंख्यकों के लिए कई योजनाएं लाने की तैयारी है। सबसे बड़ी योजना मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को छात्रावास की सुविधा मुहैया कराने की होगी।
दरअसल, चालू वित्तीय वर्ष में अल्पसंख्यकों की ‘हमारी बेटी उसका कल’ योजना बंद किए जाने के बाद उसके एवज में कोई दूसरी योजना नहीं आई।
वहीं, मदरसों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती है। चुनावी बजट में सरकार इसकी व्यवस्था करने जा रही है। इसके तहत सरकार खुद लगभग 250 मदरसों में छात्रावास बनवाएगी। इसके लिए 400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार करवाया गया है।
कब्रिस्तानों के लिए मिलेंगे 400 करोड़
प्रदेश सरकार कब्रिस्तानों की सुरक्षा और उन्हें अवैध कब्जे से बचाने के लिए चारदीवारी बनवा रही है। चुनावी वर्ष में इस योजना पर भी 400 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस योजना में 200 करोड़ रुपये दिए गए थे।
इससे पहले दिए गए थे 700 करोड़
इससे पहले वर्ष 2012-13, 2013-14 व 2014-15 में 700 करोड़ दिए गए थे। इससे 5,192 कब्रिस्तानों की ही चारदीवारी बन सकी है, जबकि सूबे में 87,696 कब्रिस्तानों की चारदीवारी बनाई जानी है।
मदरसा अनुदान के लिए अधिक बजट
चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप सभी 146 मदरसों को अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए आगामी बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान कराने का प्रस्ताव है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस योजना में 41.80 करोड़ रुपये दिए गए थे।
मदरसा आधुनिकीकरण में केंद्र को भेजेंगे ज्यादा प्रस्ताव
मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत राज्य सरकार अगले वित्तीय वर्ष में 1500 नए प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में 244 करोड़ रुपये के प्रस्तावों के मुकाबले इस बार 336 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजने की तैयारी है। इसी के अनुसार राज्यांश के मद में करीब 60 करोड़ की व्यवस्था कर ली गई है।
वक्फ बोर्ड के लिए अधिक धन
शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड अपने संसाधनों से ही अपने कर्मियों को वेतन देते हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रदेश सरकार ने दोनों वक्फ बोर्ड के लिए मात्र 15 लाख रुपये की व्यवस्था की थी। ऐसे में कर्मियों को वेतन के भी लाले पड़ गए थे। चुनावी वर्ष में सरकार किसी को नाराज नहीं करना चाहती। इसे देखते हुए आगामी बजट में 11.50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की जाएगी।
शैक्षणिक हब के लिए भी बढ़ेगा बजट
शैक्षणिक हब योजना के तहत अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में मॉडल इंटर कॉलेज खोले जाने हैं। 20 जिलों में एक गर्ल्स व एक बॉयज कॉलेज खुलना है। चुनावी बजट में इसके लिए 85 करोड़ की व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 70 करोड़ रुपये दिए गए थे।
आईएएस-पीसीएस कोचिंग के लिए अधिक बजट
सरकार ने अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को आईएएस-पीसीएस की कोचिंग के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1.17 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। आगामी बजट में इस मद में तीन गुना से अधिक यानी 3.95 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। इसी तरह अधिक से अधिक अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में काफी अधिक बजट का इंतजाम किया जा रहा है।
मार्केटिंग हब में 20 प्रतिशत भागीदारी
सरकारी योजनाओं में उद्यान विभाग में अल्पसंख्यकों को निर्धारित 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिल चुकी है। अब मंडी परिषद के मार्केटिंग हब में भी इन्हें 20 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला किया गया है।
हर ब्लॉक मुख्यालय तथा बड़े कस्बों के नजदीक बनने वाले मार्केटिंग हब में किसानों को खेती-किसानी का सारा सामान बाजार से कम कीमत पर मिलेगा। यहां किसानों से उनकी उपज भी मूल्य समर्थन योजना के तहत सीधे खरीदी जा सकेगी।
डीएम कमेटी रखेगी योजनाओं में हिस्सेदारी पर नजर
सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को 20 प्रतिशत हिस्सेदारी का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा के लिए हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है।
कमेटी निगरानी करेगी कि अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 20 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित किए बिना योजनाओं को क्रियान्वयित न किया जाए। अगर कहीं अल्पसंख्यक लाभार्थी नहीं मिलते हैं, तो वहां डीएम की समिति की अनुमति के बाद ही दूसरे वर्गों को लाभ दिया जाएगा।