राजधानी लखनऊ में रविवार को 'जय भीम पदयात्रा' का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने हरी झंडी दिखाकर किया। यात्रा मरीन ड्राइव चौराहे से शुरू होकर अंबेडकर स्मृति स्थल पर संपन्न हुई। डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती से एक दिन पूर्व आयोजित इस यात्रा में सैकड़ों युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसका उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
अपने संबोधन में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर न केवल भारत के संविधान निर्माता थे, बल्कि वे एक महान समाज सुधारक, चिंतक और न्यायप्रिय नेता भी थे। उन्होंने जीवन भर सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष किया। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख साधन माना। उन्होंने 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' का जो संदेश दिया था, वही आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा पथ प्रदर्शक है।
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मंत्री उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में 'जय भीम पदयात्रा' जैसे आयोजनों के माध्यम से बाबा साहब के विचारों को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है। यह पदयात्रा केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक जन-जागरण अभियान है, जो युवाओं को सामाजिक समता, बंधुत्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रेरित करती है।