...एक दौर था, जब मिमिक्री के लिए विदेश से बुलावे आते थे। दुबई, सऊदी अरब
और दक्षिण एशियाई देशों के तमाम आयोजनों में चुटकुलों और फिल्मी कलाकारों व
संगीतकारों की मिमिक्री कर लोगों को हंसाकर लोटपोट कर देते थे।
लेकिन अब
जब उम्र का आंकड़ा 80 पार हो चुका है और सही मायने में उन्हें मदद की जरूरत
है तो अधिकारी कलाकार वृद्धावस्था पेंशन के लिए संस्कृति विभाग और कचहरी
के चक्कर लगवा रहे हैं।
यह दर्द है
राजाजीपुरम निवासी कलाकार अहमद मियां मस्ताना (अहमद करीम) का, जिन्होंने 60
साल तक मिमिक्री के जरिए लोगों को खूब हंसाया।
अनूप जलोटा और उनके पिता पुरुषोत्तम दास जलोटा सहित तमाम संगीतकारों
संग कई कार्यक्रम किए। फिल्म जगत की सभी नामचीन हस्तियों की नकल उतारने की
कला के जरिए इंडस्ट्री में ‘शील कुमार’ के नाम से अपनी अलग पहचान बनाई।
लेकिन वही पिछले तीन महीने से आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कचहरी के चक्कर
लगा रहे हैं। उन्होंने कलाकार संस्कृति
विभाग से कलाकार वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया। विभागीय अधिकारियों
ने दो हजार रुपये प्रतिमाह का सर्टिफिकेट लाने को कहा।
कचहरी पहुंचा तो
वहां अधिकारी तीन हजार रुपए मासिक से कम का प्रमाणपत्र बनाने को तैयार
नहीं। हलफनामा भी दिया लेकिन फिर भी सर्टिफिकेट नहीं बनाया। पूछने पर
अधिकारी कहते हैं कि न्यूनतम तीन हजार रुपए का ही प्रमाणपत्र बनता है।
अहमद
बताते हैं, मैं सांस की बीमारी से पीड़ित हूं और
अधिकारी बार-बार तहसील और संस्कृति विभाग की दौड़-धूप करवा रहे हैं। पेंशन
के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख भी 16 सितम्बर है।