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Milkipur By Election Result 2025: जातियों को ऐसे साधने में सफल रही भाजपा, सपा के सफल नहीं हुए प्रयोग

Sun, 09 Feb 2025 08:50 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या

सार

Milkipur Result News: मिल्कीपुर के उपचुनावों में भाजपा जातियों वाले फैक्टर को साधने में सफल रही। दूसरी तरफ सपा की कोई रणनीति काम न आई। उसे बस उसके कोर वोटर मिल पाए। 
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मिल्कीपुर उपचुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मिल्कीपुर के चुनावी महासमर में भाजपा का जातिवार मतों को सहेजने का प्रयोग सफलतम रहा। मुख्यमंत्री की सजाई पिच पर उनके मंत्रियों समेत कई धुरंधरों ने धमाकेदार पारी खेली और पहली बार उपचुनाव में कमल खिलाया। उधर, सपा अपने मूल मतों के अलावा कुछ खास करिश्मा नहीं दिखा सकी।

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लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। किसी भी हालत में इस सीट पर भगवा लहराने के लिए उन्होंने मजबूत प्लान तैयार किया। प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, राज्यमंत्री सतीश शर्मा आदि की ड्यूटी लगाई। साथ ही अलग-अलग जाति के मतों को साधने के लिए जातिवार बड़े नेता उतारे गए। क्षत्रिय मतों को साधने के लिए पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने मोर्चा संभाला। राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह मैदान में रहे। मुख्यमंत्री के अलावा डिप्टी सीएम केशव मौर्या व ब्रजेश पाठक की सभाएं हुईं। अलग-अलग जातियों का सम्मेलन भी हुआ।

निर्णायक भूमिका में रहे ब्राह्मण मतों के बिखराव को रोकने व भाजपा के पक्ष में लामबंद करने के लिए पूर्व विधायक इंद्रप्रताप तिवारी को मैदान में उतारा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उनसे विशेष मुलाकात कर निर्देश दिया। इस चुनाव परिणाम के बेहतर होने पर उनकी बेहतरी का भी आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए उन्होंने ताबड़तोड़ जनसंपर्क, सभाएं, रैलियां आदि करके ब्राह्मणों को लामबंद किया। इसका नतीजा रहा कि पूर्व के चुनावों में ब्राह्मण बाहुल्य गांवों में भी वोटों में सेंध लगाने वाली सपा को इस बार लगभग हर इलाके में हार का मुंह देखना पड़ा। इससे पूर्व विधायक ने ब्राह्मणों में अपनी मजबूत पैठ का एहसास कराते हुए खुद के बेहतरी के बारे में सोचने पर भी विवश किया है।

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परंपरागत मतों के इर्द-गिर्द सिमटी सपा

 पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के बुलंद नारे के साथ चुनाव मैदान में उतरी सपा सिर्फ परंपरागत मतों के इर्द-गिर्द ही सिमट गई। यहां तक कि दलितों का भरोसा जीतने में भी वह कामयाब नहीं रही। इस चुनाव में बढ़त बनाना तो दूर पिछले चुनावों में मिले जनाधार को थामने में भी असफल दिखी।

मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर लगभग 70,000 यादव और 35,000 मुस्लिम मतदाता हैं। लगभग एक लाख दलित मतों में मजबूत बंटवारे व सवर्ण मतों में सेंध लगाने के ख्वाब देखते हुए सपा चुनाव मैदान में कूदी। पूरे चुनाव भर हर बिरादरी के मत हासिल करने का सपा नेता व पदाधिकारी दंभ भरते रहे, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव व 2024 के लोकसभा चुनाव में मिला जनमत भी वह नहीं थाम सके। सपा प्रत्याशी को 84,687 वोट मिले, जो कि 2022 के चुनाव से 19,218 वोट कम रहे। वहीं, लोकसभा चुनाव में भी लगभग 7,000 मतों से सपा ने जीत दर्ज की थी।

इस चुनाव परिणाम को देखकर साफ है कि सपा मूल मतों के अलावा अन्य जातियों का भरोसा नहीं जीत सकी है। पासी समाज की देश भर में ब्रांडिंग करने वाले सांसद भी सजातीय मतों को अपनी तरफ लामबंद भी नहीं कर सके। जबकि वह पासी समेत अन्य दलित मतों को बटोरने का दावा कर रहे थे।
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गुल नहीं खिला सकी ब्राह्मण नेताओं की फौज

ब्राह्मण मतों में सेंध लगाने के लिए सपा ने भी ब्राह्मण नेताओं की फौज उतारी। पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पूरे समय जनसंपर्क में जुटे रहे। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, प्रदेश महासचिव व पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय, पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी आदि नेताओं ने जनसंपर्क किया, लेकिन ब्राह्मण मतदाता टस से मस नहीं हुए। वहीं, क्षत्रिय मतों को साधने के लिए सुल्तानपुर के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू भी लगातार जनसंपर्क करते रहे, लेकिन कोई करिश्मा नहीं दिखा सके।
 
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