संसदीय कार्य मंत्री आजम खां ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि मिलावटखोरों को फांसी होनी चाहिए। केंद्र सरकार कानून बनाए राज्य सरकार उसे लागू करेगी। जब तक ऐसी सख्त सजा का प्रावधान नहीं होगा तब तक इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगेगा।
मिलावट से लोगों के स्वास्थ्य को सीधा नुकसान हो रहा है। मिलावटखोरी पकड़े जाने पर रासुका में बंद करने का निर्णय कैबिनेट में किया जा चुका है। इसे रोकने के लिए अगर केंद्र कोई कड़ा कानून लाए तो निश्चित रूप से अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाएगी।
भाजपा के सुरेश राणा के एक सवाल व अनुपूरक सवालों के जवाब में आजम ने बताया कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तथा उससे संबंधित नियम व विनियम 2011 के प्रावधानों के तहत निरीक्षण, छापों एवं विशेष अभियान के माध्यम से कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा, यह व्यापार और व्यापारियों से जुड़ा मामला है। उनकी सियासी ताकत भी है।
अपराधी को अदालत तक पहुंचाएगी राज्य सरकार
आजम ने मिलावटखोरों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए बताया कि फरवरी तक 9,677 छापे मारकर 12,654 नमूने लिए गए। 8,378 नमूनों की जांच की गई।
इनमें से 2,700 अधोमानक तथा 422 में मिलावट पाई गई। इन मामलों में 18,01,750 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। कहा, राज्य सरकार का काम अपराधी को अदालत तक पहुंचाना है। इसके बाद का काम अदालत का है।
राणा ने पूछा कि क्या सरकार सजा बढ़ाने का प्रावधान करेगी? आजम ने कहा कि कानून में संशोधन भारत सरकार ही कर सकती है। आप भी कहें, हम भी गुजारिश करते हैं।
व्यापारियों पर हाथ रखेंगे तो कैसे अच्छे दिन आएंगे। देखिए किसानों पर गलत हाथ पड़ गया। भाजपा के ही धर्मपाल सिंह ने मिलावटखोरों पर रासुका लगाने का सवाल किया तो आजम ने कहा, कैबिनेट इसका निर्णय कर चुकी है।