कोरोना को बेअसर करने के लिए फ्लाइट की तरह ताजी हवा से ठंडी रहेगी मेट्रो
मेट्रो में यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए हवाई जहाज की तर्ज पर 100 प्रतिशत ताजी हवा का उपयोग किया जाएगा। भूमिगत स्टेशनों के एसी सिस्टम में भी यही तरीका अपनाया जाएगा।
इससे ट्रेन और भूमिगत स्टेशनों पर हवा लगातार बदलती रहेगी। साथ ही स्टेशन और मेट्रो के अंदर का तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाएगा। कोरोना संक्रमण की आशंका को न्यूनतम करने के लिए मेट्रो प्रशासन यह कदम उठाने जा रहा है।
लखनऊ मेट्रो के महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) स्वदेश कुमार ने बताया कि ट्रेनों और भूमिगत स्टेशनों पर लगाए गए सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम में ठंडक दो तरीके से की जा सकती है।
इसमें अंदर ठंडी हो चुकी हवा को दोबारा स्टेशन परिसर या ट्रेनों में एसी द्वारा वापस प्रवाहित किया जाए। दूसरे तरीके में बाहर की हवा का उपयोग ठंडक के लिए अंदर की पूरी हवा को बाहर निकाल दिया जाए।
इससे हवा बदलती रहेगी। यह एक नियंत्रक के जरिए होता है। ऐसे में वायरस से संक्रमण की आशंका को भी खत्म किया जा सकेगा।
ट्रेनों और भूमिगत स्टेशनों दोनों जगह 100 प्रतिशत बाहर की ताजी हवा को एसी के जरिए प्रवाहित कर ठंडक और वातानुकूलन सुनिश्चित किया जाएगा। इससे संक्रमण से बचाव होगा और लोगों को सांस लेने में दिक्कत भी नहीं होगी।
रोजाना फिल्टर बदने की भी तैयारी
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अभी एक योजना यह भी बन रही है कि भूमिगत स्टेशनों और ट्रेनों के एसी के फिल्टर्स रोजाना बदले जाएं। पहले ठंडक कम होने की स्थिति में एक नियमित अंतराल पर इनको बदला जाता था। इसको लेकर फैसला अभी किया जाना है। केंद्रीय आवास एवं शहरी नियोजन मंत्रालय के साथ सोमवार होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद इसे फाइनल किया जाएगा।
ट्रेनों को रोजाना दो बार किया जाएगा सैनिटाइज
ट्रेनों को रोजाना दिन में दो बार अच्छे से सफाई के अलावा सैनिटाइज भी किया जाएगा। सुबह ट्रेनों के निकलते समय और रात को वापसी के बाद यह प्रक्रिया की जाएगी।
आशंका के बीच तैयारी
केंद्रीयकृत एसी के उपयोग से वायरस फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है। इस पर पूरी दुनिया में बहस चालू है। ऐसे में फ्लाइट से लेकर आम ट्रेनों के बाद मेट्रो रेल में भी इसकी संभावना पर विचार किया गया है। यूपी मेट्रो प्रशासन भी अपने यात्रियों को संक्रमण से बचाव देने के लिए एसी के उपयोग की व्यवस्था को बदल रही है।