लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना में सिविल निर्माण कार्य अगस्त से पहले नहीं शुरू किए जा सकेंगे।
जो काम नवंबर 2013 में शुरू होना था उसका आगाज अगस्त 2014 में होगा। मेट्रो रेल परियोजना में सिविल निर्माण कार्य अगस्त से पहले नहीं शुरू किए जा सकेंगे।
जून के पहले सप्ताह में परियोजना का टेंडर किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया के पूरा होने में तीन महीने का समय लगेगा।
इस तरह से पूरी परियोजना 10 महीना लेट हो जाएगी। इस वजह से परियोजना के कुल बजट में करीब 500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी।
अखिलेश का है सपना
सीएम अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी परियोजना का काम करीब 10 महीने पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है। 2017 में परिचालन का आगाज करने का लक्ष्य भी ऐसे में लेट ही होगा।
तीन मार्च को जब सीएम ने मेट्रो परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि आचार संहिता का इस पर असर नहीं पड़ेगा।
चुनाव आयोग से इजाजत लेकर सिविल निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मुख्यमंत्री की इच्छा के बावजूद अधिकारियों ने इसमें बहुत ज्यादा तेजी नहीं दिखाई।
मेट्रोमैन श्रीधरन के प्रमुख सलाहकार बनने के बाद परियोजना की नए सिरे से समीक्षा हुई। इस वजह से थोड़ा देरी और हुई।
टेंडर पूरा होने में तीन महीना
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिविल कार्यों का पहला टेंडर अब जून महीने में आचार संहिता खत्म होने के बाद ही जारी होगा।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा। इस तरह से यह काम अगस्त से पहले शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
500 करोड़ का झटका
मेट्रो परियोजना के 10 महीना लेट होने की वजह से पहले चरण में इसकी लागत 8 फीसदी तक बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार के स्तर पर हुई देरी से जनता की जेब से लगभग 500 करोड़ रुपए निकल जाएंगे।
यह परियोजना अपने पहल चरण में लगभग 6500 करोड़ रुपये की है। पीडब्ल्यूडी की कॉस्ट इंडेक्स के हिसाब से हर साल लगभग 8 से 10 फीसदी तक किसी भी परियोजना की लागत बढ़ जाती है।
एक वरिष्ठ अभियंता ने बताया कि छह महीने के लिए मेट्रो जैसी परियोजना में विलंब होगा तो निश्चित तौर पर पांच से आठ फीसदी तक बजट बढ़ेगा।
चुनाव आचार संहिता के कारण देरी
आचार संहिता से पहले शिलान्यास होने के बावजूद परियोजना में खासी ढिलाई बरती जाती रही है। मेट्रो के सिविल कार्य और डिपो निर्माण के अतिरिक्त पीएसी के जवानों के लिए अपार्टमेंट बनाने का काम भी एलएमआरसी इस दौरान शुरू नहीं कर सका।
दरअसल इसका टेंडर संहिता की वजह से जारी नहीं किया जा सका। ऐसे में आचार संहिता से पहले ही शिलान्यास करने का कोई हल नहीं निकल सका।
इस संबंध में मुख्य सचिव जावेद उस्मानी का कहना है कि कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल रपोरेशन के अधिकारियों को ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच सिविल कार्यों के लिए टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार कर के तत्काल हाईपॉवर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।
एलडीए को 32वीं वाहिनी पीएसी कैंपस में जवानों के लिए अपार्टमेंट निर्माण शुरू करने का भी आदेश दिया है। सभी काम निश्चित समय के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे।